महिलाओं के मंदिर प्रवेश को ही समानता का प्रतीक माना जाए?
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जजों की नियुक्ति में देरी का कारण सरकार नहीं है, बल्कि शीर्ष अदालत के कॉलेजियम के कारण देरी होती है। यह कहते हुए शीर्ष अदालत ने कॉलेजियम की सिफारिश पर सरकार को जल्द फैसला करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर फिलहाल कोई आदेश देने से इनकार कर दिया।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, जजों की नियुक्ति में देरी हमारी तरफ से है। यह देरी नियुक्ति के लिए जजों के नाम तय करने वाले कॉलेजियम की ओर से है। नियुक्तियां हो रही हैं। पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण से कहा, सरकार के पास 27 सिफारिश लंबित हैं, जबकि कॉलेजियम के समक्ष लंबित सिफारिशों की संख्या करीब 70 है।
इस पर भूषण ने कहा कि मेरी जानकारी के मुताबिक, सरकार के पास कई ऐसी सिफारिशें लंबित हैं, जिन पर कॉलेजियम ने दोबारा विचार करने के लिए कहा है। इसके बाद पीठ ने याचिका पर छह हफ्ते के बाद सुनवाई करने का निर्णय लिया। याचिका दाखिल करने वाले एनजीओ सीपीआईएल के मुताबिक, सिफारिशें छह हफ्ते से अधिक समय से लंबित हैं। समय पर जजों की नियुक्ति होने पर अदालत सुचारु रूप से काम कर सकेगी।