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सुप्रीम कोर्ट : मुकदमों की सुनवाई तय समय सीमा में हो, इसे लेकर ठोस कदम उठाने का समय आ गया है

Sat, 27 Nov 2021 03:26 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि मुकदमों की सुनवाई तय समय में हो इसे लेकर कदम उठाने का समय आ गया है। कोर्ट ने कहा कि जब न्यायमूर्ति एमएन वेंकटचलैया भारत के मुख्य न्यायाधीश थे तब यह सुझाव दिया गया था कि मामलों पर सुनवाई के लिए समयसीमा तय की जाए। जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा, ‘हमें इसके बारे में अब सोचने की जरूरत है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि मुकदमों की सुनवाई तय समय में हो इसे लेकर कदम उठाने का समय आ गया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि समय बहुत कम है और वकील एक मामले में एक जैसे बिंदुओं पर बहस का अनुरोध कर रहे हैं।

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कोर्ट ने कहा, समय कम होता है और वकील एक जैसे बिंदुओं पर बहस करना चाहते हैं
कोर्ट ने कहा कि जब न्यायमूर्ति एमएन वेंकटचलैया भारत के मुख्य न्यायाधीश थे तब यह सुझाव दिया गया था कि मामलों पर सुनवाई के लिए समयसीमा तय की जाए। जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा, ‘हमें इसके बारे में अब सोचने की जरूरत है। गंभीरता से इस पर विचार करने की जरूरत है। लंबे समय से यह विचार चल रहा है लेकिन हमने इसे लागू नहीं किया है। पीठ ने वरिष्ठ वकील एएम सिंघवी से कहा, आपको याद होगा कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश वेंकटचलैया के समय यह सुझाव दिया गया था कि हमारे पास सुनवाई के लिए एक समयसीमा हो।’

पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां की। हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय का आवेदन स्थानांतरित करने का केंद्रीय प्रशासनिक पंचाट(कैट) की प्रधान पीठ का आदेश रद्द कर दिया था। बंदोपाध्याय ने केंद्र द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गयी कार्यवाही कोलकाता से नई दिल्ली स्थानांतरित करने को चुनौती दी थी।
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पीठ ने इस मामले में केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ‘कृपया पहल कीजिए। अब वक्त आ गया है। बहुत कम समय बचा है और कई वकील एक मामले में इन्हीं बिंदुओं पर बहस करना चाहते हैं।’ इसपर मेहता ने कहा, कोर्ट पहल कर सकती है, हम सिर्फ सहयोग कर सकते हैं।

मौखिक दलीलों का विकल्प नहीं लिखित दलीलें: सिंघवी
सुनवाई की शुरुआत में मेहता ने पीठ से अनुरोध किया कि क्या मामले पर 29 नवंबर को सुनवाई हो सकती है क्योंकि उन्हें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित संविधान दिवस कार्यक्रम में शामिल होना है। बंदोपाध्याय की ओर से पेश वकील सिंघवी ने पीठ से कहा कि प्रतिवादी (बंदोपाध्याय) ने मामले में अपनी लिखित दलीलें दाखिल की हैं।

पीठ ने सिंघवी से कहा कि वह मेहता के दलीलें देने के बाद उन्हें सुनना चाहेगी। इस पर सिंघवी ने कहा, निश्चित रूप से। मेरी लिखित दलीलें मौखिक दलीलों का विकल्प नहीं हो सकतीं। दरअसल यदि कोर्ट लिखित दलीलों को विकल्प के रूप में स्वीकार करना शुरू कर दे तो ये खतरनाक होगा। इसपर कोर्ट ने कहा, हमें ऐसा करना शुरू करना चाहिए। कोर्ट ने बाद में सुनवाई की तारीख 29 नवंबर तय कर दी।

हाईकोर्ट का आदेश परेशान करने वाला: केंद्र
केंद्र ने 15 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि कलकत्ता हाईकोर्ट का पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय के आवेदन को कोलकाता से नई दिल्ली स्थानांतरित करने का केंदीय प्रशासनिक पंचाट(कैट) की प्रधान पीठ का आदेश खारिज करने वाला आदेश ‘परेशान करने वाला’ है।

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