जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा, हर मुकदमे में किसी एक पक्ष की हार होती है और ऐसी स्थिति में हारने वाली पार्टी के लिए वकील पर सेवा में कोताही बरतने का दावा करते हुए उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाने की अनुमति नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि मेरिट के आधार पर बहस करने के बाद वकील की हार को ‘सेवा में कोताही’ नहीं माना जा सकता है, बशर्ते वकील द्वारा कोई लापरवाही न की गई हो। इसे लेकर पक्षकार द्वारा उपभोक्ता फोरम में शिकायत नहीं की जा सकती।
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जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा, हर मुकदमे में किसी एक पक्ष की हार होती है और ऐसी स्थिति में हारने वाली पार्टी के लिए वकील पर सेवा में कोताही बरतने का दावा करते हुए उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाने की अनुमति नहीं है। हालांकि, उन मामलों में जहां वकील की सेवा में कोई कमी पाई जाती है तो मामला बन सकता है।
पीठ ने यह आदेश नंदलाल लोहारिया द्वारा राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के एक फैसले के खिलाफ दाखिल अपील को खारिज करते हुए दिया है। इससे पहले राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग और जिला उपभोक्ता अदालत ने भी इस शिकायत को खारिज कर दिया था।