सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी से बचने के लिए 100 किलोमीटर से ज्यादा लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग को छोटे खंड में बांटने की रणनीति स्वीकार नहीं होगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि क्योंकि वह इस मामले का विशेषज्ञ नहीं है, इसलिए किसी विशेषज्ञ समिति को इसके 100 किलोमीटर से छोटे खंड में बांटने की अनुमति देने योग्य पड़ताल करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के पिछले साल के फैसले को दरकिनार कर दिया। उसने पाया कि तमिलनाडु और पुडुचेरी को जोड़ने वाले 180 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे-45 विल्लुपुरम से नागापट्टिनम राजमार्ग को पर्यावरणीय मंजूरी की जरूरत नहीं है। क्योंकि इसके लिए भूमि अधिग्रहण 40 मीटर से ज्यादा नहीं है।
जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्देश दिया है। जो यह बताएगी कि 100 किलोमीटर से लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को छोटे खंड में बांटा जा सकता है या नही, यदि हां तो किस परिस्थिति में।