सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि न्यायपालिका की आजादी सीबीआई या पुलिस की दया पर नहीं छोड़ी जा सकती। शीर्ष अदालत ने फिर कहा है कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती।
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न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने जजों के नाम पर कथित रिश्वत लेने के मामले में एसआईटी जांच की याचिका खारिज कर दी। इसके समर्थन में पीठ ने संविधान पीठ के 1991 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि उच्च न्यायपालिका के मौजूदा जजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती।
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सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी जांच की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह बिना कारण संस्थान को बदनाम करने की कोशिश है। साथ ही उन्होंने इसे ‘फोरम हंटिंग’ भी बताया।