सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वत: संज्ञान लेते हुए कोरोना महामारी के चलते कंटेनमेंट जोन में लगी पाबंदी की सीमा को बढ़ा दिया। साथ ही केंद्र सरकार को कंटेनमेंट जोनों के लिए दिशानिर्देशों में बदलाव करने का भी निर्देश दिया। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फैसला सुनाया। पीठ में जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम भी शामिल हैं।
देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए पिछले महीने केंद्रीय गृहमंत्रालय ने संक्रमण के प्रसार पर रोक लगाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की थी। इसमें कहा गया था कि अगर संक्रमण के एक या दो मामले सामने आते हैं तो केवल उतने ही भाग को सैनिटाइज करने की आवश्यकता पड़ेगी, जहां पिछले 48 घंटे में मरीज की गतिविधियां रही हों।
तय नियमों के तहत सैनिटाइज करने के बाद कार्य शुरू किया जा सकता है। मंत्रालय ने कहा था कि अगर कार्य स्थल पर कई मामले सामने आते हैं तो पूरी इमारत अथवा ब्लॉक को सैनिटाइज करने की प्रक्रिया करनी होगी और उसके बाद ही कार्य शुरू किया जा सकता है।
कंटेनमेंट जोन में रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को इस बारे में अपने वरिष्ठ अधिकारी को सूचित करना चाहिए और जब तक क्षेत्र कंटेनमेंट जोन की श्रेणी से बाहर नहीं हो, तब तक कार्यालय नहीं जाना चाहिए। साथ ही ऐसे कर्मचारियों को घर से ही कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए। कंटेनमेंट जोन के अंतर्गत आने वाले कार्यालय बंद ही रहेंगे।