यदि एक से ज्यादा राजनीतिक दल सरकार बनाने का दावा करते हैं लेकिन बहुमत स्पष्ट न हो तो ऐसी स्थिति में राज्यपाल किसी एक दल को बहुमत साबित करने को कहता है। तब सदन में विशेष सत्र बुलाया जाता है, इसमें सभी विधायकों को आमंत्रित किया जाता है। हालांकि विधायकों का आना जरूरी नहीं है, परंतु उस सदस्य की पार्टी की ओर से विह्प जारी होने पर आना जरूरी होता है वरना कार्रवाई हो सकती है।
फ्लोर टेस्ट या बहुमत परीक्षण, ध्वनिमत, ईवीएम द्वारा या बैलट बॉक्स किसी भी तरह से किया जा सकता है। इस दौरान विधानसभा के सदस्य अपना मत गुप्त रूप से भी दे सकते हैं। यदि दोनों पार्टी को वोट बराबर मिलते हैं तो ऐसे में स्पीकर अपनी पसंदीदा को वोट देकर सरकार बनवा सकता है।
वोटिंग होने की सूरत में पहले विधायकों से ध्वनि मत लिया जाता है। इसके बाद कोरम की बेल बजती है। फिर सदन में मौजूद सभी विधायकों को पक्ष और विपक्ष में बंटने को कहा जाता है। विधायक सदन में बने हां या नहीं वाले लॉबी की ओर रुख करते हैं। इसके बाद पक्ष-विपक्ष में बंटे विधायकों की गिनती होती है। फिर स्पीकर परिणाम की घोषणा करते हैं।