सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि सरकारी नौकरियों में मेरिट के आधार पर ही चयन होना चाहिए। अधिक अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को नजरअंदाज कर कम मेरिट वालों लोगों का चयन करना संविधान का उल्लंघन है।
शीर्ष अदालत ने कहा- अधिक अंक पाने वालों की जगह कम मेरिट वालों की नियुक्ति करना गलत
जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने यह टिप्पणी झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखते हुए दी है, जिसमें सब इंस्पेक्टर के पद पर 43 लोगों की नियुक्ति को सही ठहराया गया था। हाईकोर्ट ने अनियमितताओं को ठीक करने के बाद जारी संशोधित सूची में मेरिट के आधार पर हुई नियुक्तियों को सही माना था।
चयन मेरिट के आधार पर ही होना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह अपने फैसले में कहा, इसमें कोई संदेह नहीं कि सरकारी नौकरियां मेरिट के आधार पर होनी चाहिए। अधिक अंक हासिल करने वालों की जगह कम मेरिट वाले लोगों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद-14 और 16 के विपरीत है।
पीठ ने कहा, 43 याचिकाकर्ताओं को दी गई राहत का मुख्य आधार यह था कि वे पहले ही नियुक्त हो चुके थे और उन्हें उसके लिए सजा नहीं दी जा सकती, जो गलती उन्होंने नहीं की है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया।
यह था पूरा मामला
झारखंड में वर्ष 2008 में सब इंस्पेक्टर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मंगाए गए थे। परीक्षा में 382 लोगों का चयन हुआ। लेकिन बाद में अनियमितता की शिकायत पर सरकार ने उच्च स्तरीय कमेटी बनाई। असफल लोगों ने रांची में झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इस दौरान पहली सूची के तहत हुई 42 लोगों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया, जबकि पुलिस निदेशक की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश के बाद तैयार की गई नई लिस्ट के आधार पर 43 लोगों की नियुक्ति हुई। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अनियमितता के लिए इन 43 अभ्यर्थियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इन सभी के खिलाफ किसी तरह की धोखाधड़ी या अनियमितता बरतने का आरोप नहीं है।