सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों को कहा है कि फैसलों में देरी अनुच्छेद-21 के तहत संविधान में मिले जीवन के मूल अधिकार का उल्लंघन है। न्यायिक अनुशासन के लिए निर्णय लेने में तत्परता की जरूरत होती है। इसे बार-बार कहा भी गया है। कोर्ट ने इस बारे में देशभर के हाईकोर्ट को रिमाइंडर जारी किया है।
शीर्ष अदालतों ने उच्च न्यायालयों को जारी किया रिमाइंडर
जस्टिस संजय किशन कौल और ऋषिकेश रॉय की पीठ ने कहा, समस्या तब है जब नतीजा पता हो लेकिन कारण नहीं। यह किसी पीड़ित को न्याय पाने के अवसर से वंचित करता है। पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के फैसले खिलाफ दायर याचिका पर यह फैसला दिया। हाईकोर्ट ने इस साल 21 जनवरी को सुनाए जो मामले में क्रियान्वयन का हिस्सा था। जबकि बेंच ने नौ महीने बाद नौ अक्तूबर को फैसले की वजह बताई।