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SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पत्रकार होने का मतलब कानून हाथ में लेने का लाइसेंस नहीं, जानिए क्या है पूरा मामला

Thu, 20 Jul 2023 06:12 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पत्रकार ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने पहले याचिकाकर्ता और अन्य पत्रकारों को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता अब अंतरिम सुरक्षा का हकदार नहीं है। याचिकाकर्ता दूसरे मामलों में भी शामिल है। इसके अलावा, राज्य के वकील के अनुसार उसके खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है।
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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पत्रकार या रिपोर्टर होने का मतलब ये नहीं है कि आपके पास कानून अपने हाथ में लेने का लाइसेंस है। शीर्ष अदालत ने एक पत्रकार की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। पत्रकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के अग्रिम जमानत देने से इनकार के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की खंडपीठ के समक्ष पत्रकार के वकील ने बताया कि उनका मुवक्किल एक मान्यता प्राप्त संवाददाता है।

उसने 26 जुलाई 2021 को एक दैनिक अखबार में छपी खबर में नवजात बच्चे की अवैध बिक्री से जुड़े एक रैकेट का पर्दाफाश किया था। जवाबी कार्रवाई में आरोपियों में से एक को गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में उस पर खबर दबाने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप लगा। पत्रकार ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने पहले याचिकाकर्ता और अन्य पत्रकारों को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता अब अंतरिम सुरक्षा का हकदार नहीं है। याचिकाकर्ता दूसरे मामलों में भी शामिल है। इसके अलावा, राज्य के वकील के अनुसार उसके खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। ऐसी स्थिति में उसे हिरासत में लेने की जरूरत है इस पर जांच अधिकारी को विचार करना है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा-आरोपों के अनुसार, फिरौती 50 लाख रुपये की मांगी गई थी और भुगतान की गई रकम केवल 50,000 रुपये थी। ये शिकायतकर्ता की तरफ से एफआईआर में दिया गया अविश्वसनीय बयान है। इस पर जस्टिस बोपन्ना ने कहा, इन दिनों कुछ भी विश्वसनीय या अविश्वसनीय नहीं है। 

अवैध खनन में जब्त वाहनों को छोड़ने के आदेश रद्द

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सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनिजों और गिट्टी के परिवहन में इस्तेमाल जब्त किए गए वाहनों को छोड़ने के राजस्थान हाईकोर्ट के विभिन्न आदेशों को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली राजस्थान सरकार की याचिका पर शीर्ष अदालत ने यह फैसला दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अहसनुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ के समक्ष राजस्थान सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनीष सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट की ओर से जब्त वाहनों को यंत्रवत छोड़ने का आदेश दिया गया था, जैसा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत अन्य सामान्य मामलों में किया जाता है। सिंघवी ने कहा कि राजस्थान गौण खनिज रियायत (आरएमएमसी) नियम, 2017 और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुसार, अन्य मामलों में जब्त वाहनों की तुलना में अवैध खनिजों के परिवहन में जब्त वाहनों के मामलों को भारी जुर्माना भरना पड़ता है।

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