पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के आदेश में फिलहाल चुनावी राज्यों को छूट दी गई है। अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव से गुजरने वाले राज्यों पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी को थानों में कैमरे लगवाने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया गया है।
हिरासत में टॉर्चर रोकने के लिए उठाया कदम
पीठ ने पिछले साल जुलाई में हिरासत में टॉर्चर करने के एक मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस थानों में मानवाधिकार हनन पर चिंता जताई थी। इस दौरान पीठ ने 2017 के अपने एक फैसले का संज्ञान लिया था, जिसमें शीर्ष अदालत ने सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और अपने 3 अप्रैल, 2018 के आदेश के तहत केंद्र व राज्य स्तर पर एक ओवरसाइट कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था।
दिसंबर में जांच एजेंसियों के दफ्तर भी आए दायरे में
पीठ ने गत दो दिसंबर को हिरासत में प्रताड़ना को रोकने के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी पुलिस थानों के साथ-साथ सीबीआई, ईडी, एनसीबी और एनआईए समेत सभी केंद्रीय जांच एजेंसियों के कार्यालयों में भी सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने केंद्र और सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों को ईमानदारी से इस काम को जल्द से जल्द अंजाम देने के लिए कहा था।
थाने का चप्पा-चप्पा दिखे सीसीटीवी में
पिछले साल शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेश अपने हर पुलिस थाने के चप्पे-चप्पे को सीसीटीवी की जद में लाएं। यह सुनिश्चित किया जाए कि थाने में अंदर आने व बाहर जाने के रास्तों, मुख्य द्वार, हवालात, कॉरिडोर, लॉबी व रिसेप्शन समेत हवालात के बाहर की जगह भी सीसीटीवी कैमरों की नजरों से नहीं छूटनी चाहिए।
क्यों पड़ी जरूरत
83 मामले दर्ज हुए साल 2020 में पुलिस हिरासत में मौत के।
127 मामले साल 2019 में पुलिस के खिलाफ दर्ज हुए।
05 मौत औसतन रोजाना होती है पुलिस व न्यायिक हिरासत में।
(स्रोत- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग)