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SC: सात फीसदी से भी कम अदालतों में महिलाओं के अनुकूल शौचालय, सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में खुलासा

Wed, 17 Jan 2024 06:40 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 35 फीसदी परिसरों में शौचालय न्यायिक अधिकारियों के कक्षों से जुड़े नहीं होने के कारण पुरुष और महिला दोनों न्यायाधीशों को साझा शौचालय का उपयोग करना पड़ता है।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश के केवल 6.7 फीसदी जिला न्यायालय परिसरों में मौजूद शौचालय ही महिलाओं के अनुकूल हैं। 19.7 फीसदी में महिलाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है। 73.4 फीसदी जिला अदालतों के शौचालयों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग की ओर से प्रकाशित रिपोर्ट स्टेट ऑफ द जुडिशरी : रिपोर्ट ऑन इंफ्रास्ट्रक्चर, बजटिंग, ह्यूमन रिसोर्सेज एंड आईसीटी के मुताबिक, 88% कोर्ट परिसरों में पुरुषों के लिए शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। महिलाओं की गरिमा, स्वच्छता और स्वास्थ्य अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए महिला शौचालयों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें उपलब्ध होनी चाहिए। महाराष्ट्र की जिला अदालतों में तो केवल 18 सैनिटरी नैपकिन डिस्पेंसर मशीनें उपलब्ध हैं।

35 % परिसर कक्षों से जुड़े नहीं शौचालय

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रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 35 फीसदी परिसरों में शौचालय न्यायिक अधिकारियों के कक्षों से जुड़े नहीं होने के कारण पुरुष और महिला दोनों न्यायाधीशों को साझा शौचालय का उपयोग करना पड़ता है।

सुविधाओं के अभाव की दी जानकारी
12 उच्च न्यायालयों ने जिला अदालत परिसरों में न्यायाधीशों, कर्मचारियों, वकीलों और वादियों के लिए शौचालयों की महत्वपूर्ण कमी को लेकर अवगत कराया है। जिला अदालतों में न केवल शौचालयों का अभाव है, बल्कि ऐसे शौचालय भी हैं जो महज नाम के लिए हैं। इनमें से कुछ काम नहीं कर रहे, जबकि कुछ के दरवाजे टूटे हुए हैं।

62.8% में प्यूरीफायर

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सभी जिला अदालत परिसरों में पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन केवल 62.8 फीसदी में पानी को शुद्ध करने के लिए प्यूरीफायर मौजूद हैं। शेष अदालत परिसरों में सीधे नल से पानी सप्लाई किया जा रहा है।

सीजेआई जता चुके हैं चिंता
एक कार्यक्रम में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने मौजूदा स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा था कि मुझे बताया गया है कि महिला जिला न्यायाधीशों के पास शौचालय सुविधाओं का अभाव है। वे सुबह आठ बजे घर से निकलती हैं और शाम छह बजे घर लौटने पर ही इसका उपयोग कर पाती हैं।

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