सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उम्मीद वक्फ पोर्टल में तकनीकी और संरचनात्मक खामियों को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका मध्य प्रदेश के वक्फ मुतावली हश्मत अली ने दायर की थी। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि उठाए गए मुद्दे मुख्य रूप से प्रशासनिक हैं और इन्हें उचित अधिकारियों के पास ले जाना चाहिए। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को अपने शिकायत निपटान के लिए संबंधित प्राधिकरण से संपर्क करने की अनुमति दी।
याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दे
- उम्मीद पोर्टल में तकनीकी और संरचनात्मक खामियां।
- वक्फ श्रेणियों का 2025 के नियमों के तहत पुनर्वर्गीकरण, जैसे कि 'वक्फ बाय सर्वे' को 'वक्फ बाय यूजर' में समाहित करना।
- डिजिटल पंजीकरण के अनिवार्य आदेश के पालन पर सवाल।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में सांविधानिक या कानून के मूल प्रश्न नहीं उठाए गए, बल्कि केवल पोर्टल की प्रशासनिक कठिनाइयों को लेकर शिकायत थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने पर इसे हल किया जा सकता है।
UMEED पोर्टल और कानून की पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार ने 6 जून 2025 को एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास (UMEED) पोर्टल लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य सभी वक्फ संपत्तियों का डिजिटल इन्वेंटरी तैयार करना और उन्हें जियो-टैग करना है। इस पोर्टल के अनुसार, सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों का विवरण छह महीने के भीतर अपलोड करना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिसंबर को इस पंजीकरण की समय सीमा बढ़ाने की याचिका भी खारिज कर दी थी।
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