उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उत्तर सरकार के इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज रखने के निर्णय के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। इससे पहले शनिवार, शुक्रवार और गुरुवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि अनुच्छेद 51 (फ) में भारत के हर नागरिक को प्राचीन धरोहर, संस्कृति की सुरक्षा करने का अधिकार है। बिना केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के राज्य सरकार द्वारा जिले का नाम बदलना अनुचित है।
याचिका में आधार लिया गया था कि मुगल शासक
अकबर ने प्रयाग का नाम नहीं बदला था अपितु उन्होंने इलाहाबाद के नाम से नया जिला बनाया था। अंक शास्त्र और ज्योतिषशास्त्र के अनुसार प्रयागराज का अंक सात होता है जो केतु ग्रह से प्रभावित है, जबकि इलाहाबाद का अंक छह है जो शुक्र गृह से प्रभावित है। अंक छह प्रगति का द्योतक है। प्रयागराज से मात्र आध्यात्मिक मोक्ष का तात्पर्य है।
बता दें कि शनिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किए जाने के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता अधिवक्ता सुनीता शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा इस संबंध में 18 अक्तूबर को जारी अधिसूचना को चुनौती दी थी। याचिका में मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ सहित अन्य लोगों को पक्षकार बनाया गया था।
याचिका के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव के अनुसार इलाहाबाद नाम के साथ पौराणिकता जुड़ी हुई है। यह प्रयागराज से अधिक पुराना है। प्रतिष्ठानपुरी के शासक मनु की पुत्री इला के नाम से इलावास बना, जो बाद में इलावास और फिर इलाहाबाद हो गया। अकबर से लेकर अंग्रेजों के शासनकाल में इलाहाबाद के नाम से ही इस जिले ने प्रसिद्धि पाई है। स्वतंत्रता आंदोलन में भी इसी नाम से इसकी ख्याति हुई।