गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मांग खारिज किए जाने से पहले गुरुवार को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इससे संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका में दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती दी गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करने से मना करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मुद्दा अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है ऐसे में इस पर सुनवाई नहीं की जा सकती।
डीपीसीसी के खिलाफ दाखिल की गई याचिका में पटाखा कारोबारियों ने कहा था कि डीपीसीसी द्वारा 14 सितंबर को लगाया गया प्रतिबंध अवैध और मनमाना है। डीपीसीसी के फैसले से उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। इन व्यापारियों ने मांग की थी कि हाई कोर्ट उन्हें ग्रीन पटाखों को बेचने की अनुमति दे।
इससे पहले 10 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सांसद मनोज तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पटाखा बैन के फैसले को बदलने से इनकार कर दिया था। याचिका में भाजपा सांसद ने दीवाली के त्योहारों के दौरान पटाखों पर रोक, उसकी बिक्री, खरीद और इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध को चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान भाजपा नेता के वकील ने जोर देकर कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण हो रहा है।
उनकी इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में लगाए गए पटाखा बिक्री पर बैन के अपने फैसले को बदलने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बारे में पहले की आदेश जारी किए जा चुके हैं। इस दौरान, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने दिवाली के दौरान प्रदूषण के स्तर पर चिंता व्यक्त की थी। पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के स्तर की जांच के लिए एक जनवरी, 2023 तक सभी प्रकार के पटाखों के भंडारण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के दिल्ली सरकार के आदेश पर रोक को उचित ठहराया था। पीठ ने यह भी कहा था कि हम प्रदूषण नहीं बढ़ाना चाहते हैं। पीठ ने यह भी कहा कि वे पटाखों के लिए अनुमति नहीं दे सकते हैं फिर चाहें बात ईको फ्रेंडली पटाखों की ही क्यों न हो।