सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें मध्य प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन नहीं करने पर वाहनों को किसी भी पेट्रोल पंप पर पेट्रोल नहीं देने का आदेश दिया गया था। जस्टिस अरुण मिश्रा ओर जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा, ऐसा आदेश पारित करने की अधिकरण को कोई शक्ति नहीं है और न ही यह इसके क्षेत्राधिकार में ही आता है।
पीठ ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं कि पर्यावरण की सुरक्षा और हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए कडे़ कदम उठाए जाने चाहिए। कडे़ कदम उठाए जाएं, मगर कानून के मुताबिक। पीठ ने कहा, वैध प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) सर्टिफिकेट न रखने वाले वाहनों को ईंधन की आपूर्ति रोकने पर 1989 के केंद्रीय मोटर वाहन नियम या एनजीटी अधिनियम के तहत विचार नहीं किया गया।
पीठ ने यह भी कहा कि एनजीटी के आदेश का पालन करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार को 25 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश देना भी एनजीटी के अधिकारक्षेत्र से बाहर है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मध्य प्रदेश सरकार की याचिका पर आया है, जिसने एनजीटी के 21 अप्रैल, 2015 के इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी।