1984 के सिख दंगा के एक मामले में दोषी ठहराए गए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार द्वारा सजा को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले वर्ष मई महीने में सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही सज्जन कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया। मालूम हो कि सज्जन कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह कोई साधारण मामला नहीं है। किसी भी तरह का आदेश पारित करने के लिए सुनवाई जरूरी है।
मालूम हो कि निचली अदालत ने को 84 दंगे के एक मामले (राजनगर दंगा) में सज्जन कुमार को बरी कर दिया था लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने गत वर्ष 17 दिसंबर को सज्जन कुमार को धारा-302 सहित अन्य धाराओं में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जिसकेबाद सज्जन कुमार ने गत वर्ष 31 दिसंबर को आत्मसमर्पण किया था।
जस्टिस एसए बोबड़े और बीआर गवाई की बेंच ने कहा कि ये कोई साधारण मामला नहीं है और इसमें किसी भी आदेश को पारित करने से पहले सुनवाई की आवश्यकता है। 73 वर्षीय कुमार ने दोषी साबित होने और उम्रकैद की सजा मिलने के बाद कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
जिस मामले में उन्हें दोषी साबित कर सजा दी गई है, वह दिल्ली के पांच सिखों की एक-दो नवंबर, 1984 को हुई हत्या का मामला है। भारत में सिख दंगे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्तूबर, 1984 को हुई हत्या के बाद हुए थे। उनकी हत्या उनके दो सिख बॉडीगार्ड ने की थी।