गौरतलब हो कि दिल्ली में निजामुद्दीन मरकज के तब्लीगी जमात और इसे लेकर मुसलमानों की छवि खराब करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए जमीयत उलमा-ए-हिंद कुछ न्यूज चैनलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी का कहना था कि हमारी शिकायत की बुनियाद पर कोर्ट सख्त रवैया अपनाएगा क्योंकि पहले भी इस सिलसिले में कड़ी हिदायत दी गई है।
मौलाना मदनी ने बताया था कि इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है क्योंकि तब्लीगी जमात की जो तस्वीर पेश की जा रही है, उससे लगता है कि मुल्क के अंदर कोरोना इन्हीं लोगों की वजह से आया है। इसके नाम पर पूरी मुस्लिम कौम को दागदार करने की कोशिश की जा रही है। कुछ टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर भी मुस्लिमों की छवि को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है।
मौलाना मदनी ने कहा कि बहुत से समझदार पढ़े लिखे हिंदू और कुछ मीडिया वाले ऐसे भी हैं, जो इसे नापसंद कर रहे हैं। खुशी की बात यह है कि खुद आरएसएस के नेता मनमोहन वैद्य का कहना है कि मुसलमानों की छवि खराब न की जाए। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वालों में हिंदू भी हैं और मुसलमान भी, जो इस वायरस को लेकर आए हैं, लेकिन सिर्फ मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराना गलत है।
मार्च महीने में दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में तब्लीगी जमात के हजारों लोग शामिल हुए थे। इस दौरान देश में कोरोना का संक्रमण फैल चुका था। दिल्ली पुलिस ने तब्लीगी जमात के प्रमुख मौलाना मोहम्मद साद को कोरोना संकट के मद्देनजर आयोजन टालने के लिए कहा था, लेकिन इसके बाद भी मरकज के कार्यक्रम में देश-दुनिया के हजारों लोग जुटे।
इसके बाद हजारों लोग यहां से देश के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक प्रचार के लिए निकल गए थे। तेलंगाना में जमात से जुड़े लोगों की कोरोना से मौत का खुलासा होने पर पुलिस ने मकरज से करीब 2300 लोगों को निकालकर क्वारंटीन किया था। तब्लीगी जमात के लोगों की वजह से तमिलनाडु, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात में कोरोना संक्रमण के कई मामले सामने आए थे। इसके साथ ही तब्लीगी जमात के लोग हरियाणा के जिन पांच गांवों में गए थे, उन गांवों को भी सील कर दिया गया था।
बता दें कोरोना वायरस के संक्रमण को तेजी से फैलने से रोकने के लिए तब्लीगी जमात और उनके संपर्क में आए 25 हजार लोगों को पूरे देश में क्वारंटाइन किया गया है। तब्लीगी जमात के कुल 2,083 विदेशी सदस्यों में से 1,750 सदस्यों को अभी तक ब्लैक लिस्ट में डाला जा चुका है।
इस मामले के सामने आने के बाद मीडिया में इसकी कवरेज को लेकर तब्लीगी जमात के सदस्यों के भीतर काफी नाराजगी थी, इसे देखते हुए इसकी तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
याचिका में कहा गया कि तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए पूरे मुस्लिम समुदाय को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इन दिनों सोशल मीडिया में कई तरह के वीडियो और फेक न्यूज शेयर की जा रही हैं। जिनसे मुस्लिमों की छवि खराब हो रही है। इनसे तनाव बढ़ सकता है, जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र और मुस्लिमों की जान पर खतरा है। साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन भी है।