फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Supreme Court: 'अदालत मामलों के निपटारे की समय सीमा तय नहीं करेगी'; याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Thu, 04 Jun 2026 01:22 PM IST
अमन तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिसमें मुकदमों को तय समय में निपटाने के लिए नियम बनाने की मांग की गई थी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने एक वकील की इस अर्जी को खारिज कर दिया। याचिका में देशभर की अदालतों में बार-बार मिलने वाली तारीखों (स्थगन) को रोकने के लिए कड़े और एक समान नियम बनाने का आग्रह किया गया था।

विज्ञापन


याचिकाकर्ता ने सभी अदालतों के लिए एक 'नेशनल केस फ्लो मैनेजमेंट पॉलिसी' लागू करने की मांग भी की थी। इसमें मुकदमों के हर चरण के लिए समय सीमा तय करने, जरूरत पड़ने पर रोजाना सुनवाई करने और पुराने लंबित मामलों को प्राथमिकता से निपटाने का सुझाव दिया गया था। सुनवाई के दौरान बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे इस मामले को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया, स्टेट बार काउंसिल और विभिन्न बार एसोसिएशनों के पास जाएं। अदालत ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की कि वे वकीलों से दुश्मनी नहीं लेना चाहते क्योंकि हम वकीलों के दोस्त हैं।

सरकारी नौकरी में तय योग्यता का पालन जरूरी, अधिक पढ़े-लिखे लोग कम योग्यता वाले पदों पर नहीं कर सकते दावा 
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सरकारी नौकरी केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मिलनी चाहिए जो तय की गई योग्यता को पूरा करते हैं। कोर्ट के अनुसार, अगर कोई अधिक पढ़ा-लिखा व्यक्ति कम योग्यता वाले पद पर नौकरी पाता है, तो वह उस व्यक्ति का अवसर छीन लेता है जो वास्तव में उस पद के लिए योग्य और हकदार है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने यह टिप्पणी मद्रास हाई कोर्ट के एक पुराने आदेश को रद्द करते हुए की। हाई कोर्ट ने एक बैंक अटेंडेंट को फिर से काम पर रखने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाई कोर्ट ने इस बात को नजरअंदाज किया कि कर्मचारी ने अपनी स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री छिपाई थी। यह पद केवल 10वीं कक्षा तक की योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए ही रखा गया था।

पीठ ने कहा कि जब कोई पद विशेष रूप से कम शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए हो, तो वहां अधिक योग्यता वाले व्यक्ति को अनुमति देना गलत है। इससे उन लोगों के साथ अन्याय होता है जो जीवनी परिस्थितियों के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि योग्यता की ऊपरी सीमा तय करना पूरी तरह तर्कसंगत और न्यायसंगत है। राज्य एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कुछ पदों को ऐसे लोगों के लिए आरक्षित रख सकता है। इससे उन्हें उन उम्मीदवारों से मुकाबला नहीं करना पड़ता जिनके सामने उनके चयन की संभावना बहुत कम होती है। कोर्ट ने बैंक के उस फैसले को सही माना जिसमें जानकारी छिपाने पर कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया गया था।
विज्ञापन

एआई के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट का मसौदा जारी
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक व्यवस्था के आधुनिकीकरण और न्यायिक स्वतंत्रता की सुरक्षा के उद्देश्य से अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग के लिए मसौदा नियमावली जारी की है। मसौदे में स्पष्ट किया गया कि किसी भी न्यायिक परिणाम तक केवल एल्गोरिदम या एआई के आधार पर नहीं पहुंचा जा सकता। अंतिम फैसला जज ही करेंगे, जबकि एआई सिर्फ एक सहायक की भूमिका में होगा। शीर्ष अदालत ने इस मसौदे पर 20 जून तक हितधारकों और आम जनता से सुझाव मांगे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की एआई समिति की ओर से तैयार मसौदे के अनुसार, एआई का उपयोग केस प्रबंधन, नई याचिकाओं में त्रुटियों की पहचान, कॉज लिस्ट तैयार करने, सुनवाई की समय-सारिणी बनाने और मामलों की प्राथमिकता तय करने जैसे कार्यों में किया जा सकेगा। ये नियम सुप्रीम कोर्ट, सभी हाईकोर्ट, अधीनस्थ अदालतों, ट्रिब्यूनलों और वैधानिक आयोगों पर लागू होंगे।

सहायक भूमिका में एआई...
35 पन्नों के मसौदे में साफ कहा गया कि एआई केवल सहायक भूमिका निभाएगा और न्यायाधीशों के अधिकारों का स्थान नहीं ले सकता। नियम 20 के तहत एआई का उपयोग फैसला लिखने, सजा तय करने या गवाहों की विश्वसनीयता का आकलन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। मसौदे में ह्यूमन-इन-द-लूप (एचआईटीएल) व्यवस्था अनिवार्य की गई है, जिसके तहत अंतिम निर्णय का अधिकार केवल न्यायिक अधिकारी के पास होगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून, तथ्य और न्याय से जुड़े सभी अंतिम निर्णय न्यायाधीश ही करेंगे, जबकि एआई केवल सहायक उपकरण के रूप में काम करेगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें