सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें केंद्र और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) को समय-समय पर अपने सभी कर्मियों के विशिष्ट मानसिक स्वास्थ्य आकलन करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे ड्यूटी के दौरान न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी फिट हैं या नहीं। हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ताओं को प्रतिनिधित्व के साथ संबंधित प्राधिकारी से संपर्क करने की स्वतंत्रता दे दी। सेवानिवृत सीआरपीएफ सब-इंस्पेक्टर याचिकाकर्ता महावीर सिंह और टी उन्नीकृष्णन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह ने तर्क दिया कि आत्महत्या के रुझान बढ़ रहे हैं और कोई परामर्श उपलब्ध नहीं है और न ही मनोरोग देखभाल भी उपलब्ध है। वहीं वकील की दलील पर पीठ ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ताओं ने संबंधित प्राधिकरण के समक्ष कोई अभ्यावेदन दायर किया है और उन्हें प्राधिकरण को आवेदन करने के लिए कहा है।