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देश में डॉक्टरों, जजों, सांसदों, पानी की कमी है, हम क्या-क्या देखें?: सुप्रीम कोर्ट

Fri, 26 Jul 2019 08:38 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम बिहार में बच्चों पर कहर बनकर टूटा - फोटो : PTI
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उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से पीड़ित बच्चों के इलाज से संबंधित जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएं।

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सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा, 'आप क्या चाहते हैं? क्या हम यहां पर डॉक्टरों की पोस्ट भरना शुरू करें? हम न्यायाधीशों के पदों को भरने की कोशिश कर रहे हैं और आप देख सकते हैं कि हमें क्या मिला है। डॉक्टरों की कमी है, जजों, सांसदों, पानी, धूप की कमी है। हम क्या-क्या देखें?'
  उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामों पर गौर किया, जिनमें कहा गया है कि 100 से अधिक मौतों का कारण बने चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) का मुकाबला करने के लिए वे सहयोग कर रहे हैं और इससे लड़ने के लिए साथ मिल कर काम कर रहे हैं। 
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शीर्ष न्यायालय ने कहा, बिहार (सरकार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के हलफनामों पर गौर करते हुए तथा बिहार के विभिन्न हिस्सों में चमकी बुखार की समस्या से लड़ने के लिए उठाये गए कदमों को मद्देनजर रखते हुए हम इन रिट याचिकाओं की ओर सुनवाई करने के इच्छुक नहीं हैं। 
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