फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, जानें क्या कहा

Mon, 03 Jul 2023 03:08 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

यह याचिका वकील महेश कुमार तिवारी द्वारा दायर की गई है। याचिका में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की देश में दुर्घटनावश होने वाली मौतों के आंकड़ों का हवाला दिया गया था। 
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इस याचिका में कोर्ट से घरेलू हिंसा का शिकार हुए पुरुषों के आत्महत्या से जुड़े मामलों से निपटने के लिए गाइडलाइंस बनाने और आयोग के गठन की मांग की गई थी । हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता ने इस मामले को सुनने से ही इनकार कर दिया। 
विज्ञापन


कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा, "आप सिर्फ एकतरफा तस्वीर पेश करना चाहते हैं। क्या आप हमें शादी के बाद जान गंवाने वाली युवा लड़कियों का आंकड़ा दे सकते हैं। कोई भी सुसाइड नहीं करना चाहता। यह अलग-अलग मामलों में तथ्यों पर आधारित बात है।"

यह याचिका वकील महेश कुमार तिवारी की ओर से दायर की गई थी। याचिका में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की देश में दुर्घटनावश होने वाली मौतों के आंकड़ों का हवाला दिया गया। 
विज्ञापन


शादीशुदा पुरुषों के चौंकाने वाले आत्महत्या के आंकड़े
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में देश में 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की। याचिका में कहा गया है कि आत्महत्या करने वाले लोगों में से 81,063 पुरुष थे और 28,680 महिलाएं थी। याचिका के अनुसार, साल 2021 में 33.2 प्रतिशत पुरुषों ने पारिवारिक समस्याओं के चलते आत्महत्या की। वहीं महिलाओं में ये आंकड़ा 4.8 प्रतिशत है।

याचिका में मांग की गई थी कि घरेलू हिंसा के शिकार पुरुषों की शिकायतों पर कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। 
Trending Videos
विज्ञापन

गोरक्षा के नाम पर हत्या की एसआईटी जांच की मांग पर सुनवाई से इन्कार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मेवात में गोरक्षा के नाम पर मुस्लिमों की हत्या की जांच एसआईटी से कराने की पीड़ित परिवारों की याचिका पर सुनवाई से इन्कार कर दिया। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता इसके लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। याचिका में गोरक्षा को लेकर बने राजस्थान और हरियाणा के कानूनों को भी रद्द करने की मांग की गई थी। याचिका में मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा के मामलों की निगरानी करने और पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट तलब करने की भी मांग की गई थी।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें