सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता वकील सुलेमान मोहम्मद खान को एक चुनाव याचिका दाखिल करने के लिए कहा। पीठ ने कहा कि 'यह चुनाव कानून को उल्टा करने के बराबर है। आप रिट याचिका दायर करके चुनाव को कैसे चुनौती दे सकते हैं? कृपया एक चुनाव याचिका दायर करें।'
रामपुर सदर विधानसभा सीट पर उपचुनाव को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इनकार कर दिया। इस जनहित याचिका में कहा गया था कि रामपुर सदर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में कई मतदाताओं को वोट डालने से रोक दिया गया था। याचिकाकर्ता ने इस आधार पर उपचुनाव को रद्द करने की मांग की थी। बता दें कि आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को अयोग्य घोषित किए जाने के कारण यह सीट खाली हुई थी।
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सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता वकील सुलेमान मोहम्मद खान को एक चुनाव याचिका दाखिल करने के लिए कहा। पीठ ने कहा कि 'यह चुनाव कानून को उल्टा करने के बराबर है। आप रिट याचिका दायर करके चुनाव को कैसे चुनौती दे सकते हैं? कृपया एक चुनाव याचिका दायर करें।' पीठ ने आगे कहा कि अब तो नतीजे भी घोषित हो चुके हैं और चुनाव याचिका के अलावा किसी याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि इस पीठ में जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला भी शामिल हैं।
पीठ की टिप्पणी से सहमति दिखाते हुए याचिकाकर्ता सुलेमान मोहम्मद खान ने कहा कि अगर उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की होती, तो वहां सुनवाई के लिए कम से कम दस दिनों तक सूचीबद्ध नहीं होती। साथ ही चुनाव याचिका केवल परिणाम घोषित होने के बाद ही दायर की जा सकती है और उन्होंने याचिका उससे पहले दायर की थी। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता से जनहित याचिका वापस लेने के लिए कहा।
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गौरतलब है कि रामपुर सदर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच मुख्य मुकाबला था। दोनों दलों ने एक दूसरे पर चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया था। वहीं, 8 दिसंबर को घोषित परिणामों में रामपुर सदर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार आकाश सक्सेना ने आजम खान के उम्मीदवार असीम राजा को हरा दिया था।