सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फास्टैग की अनिवार्यता के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने इस मसले पर याचिकाकर्ता को पहले दिल्ली हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है। केंद्र सरकार ने 15 फरवरी से सभी वाहनों के लिए फास्टैग को अनिवार्य कर दिया है।
चीफ जस्टिस की पीठ ने याचिकाकर्ता को पहले दिल्ली हाईकोर्ट जाने के लिए कहा
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राजेश कुमार से कहा कि आप अनुच्छेद-32 से जरिये सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आएं। जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस मसले का प्रभाव पूरे देश पर है।
इसलिए उन्होंने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि हम मानते हैं कि यह एक महत्वपूर्ण मामला है लेकिन बेहतर होगा आप पहले दिल्ली हाईकोर्ट जाएं।
हमें भी यह जानने का मौका मिलेगा कि हाईकोर्ट इस मसले पर क्या फैसला देता है। इससे आगे की सुनवाई बेहतर तरीके से हो सकेगी। इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने खुद ही याचिका वापस ले ली और कहा कि वह पहले हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे।
याचिका में कहा गया था कि कई बुजुर्ग लोगों ने सीमित जरूरत के लिए गाड़ी रखी हुई। वे गाड़ी लेकर हाईवे पर नहीं जाते लेकिन नए नियमों के तहत ऐसी गाड़ियों पर भी फास्टैग न होने पर जुर्माना लगाया जा रहा है।
साथ ही याचिका में फिटनेस सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस रिन्यू करने के लिए फास्टैग अनिवार्य करने का मसला उठाया गया था। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सभी वाहनों के लिए फास्टैग अनिवार्य कर दिया है। फास्टैग न होने पर वाहन मालिकों से हाईवे पर दोगुना टोल लेने का प्रावधान है।