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Supreme Court: असम में निर्वासन अभियान के आरोप वाली याचिका पर विचार से सुप्रीम कोर्ट का इनकार,पढ़ें अहम खबरें

Mon, 02 Jun 2025 09:23 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार पर राष्ट्रीयता सत्यापन या कानूनी उपाय समाप्त हुए बिना विदेशी होने के संदेह वाले लोगों को हिरासत में लेने और निर्वासन अभियान शुरू करने के आरोप वाली याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। जस्टिस संजय करोल व जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने याचिकाकर्ता से गौहाटी हाईकोर्ट जाने को कहा।

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पीठ ने याचिकाकर्ता ऑल बीटीसी माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन के वकील संजय हेगड़े से पूछा, आप गौहाटी हाईकोर्ट क्यों नहीं जा रहे हैं? हेगड़े ने कहा कि याचिका शीर्ष अदालत की ओर से पहले पारित एक आदेश पर आधारित है। इसके बाद पीठ ने हेगड़े को हाईकोर्ट जाने को कहा। इस पर हेगड़े ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया। वकील अदील अहमद के माध्यम से दायर याचिका में शीर्ष अदालत के 4 फरवरी के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें एक अलग याचिका पर विचार करते हुए असम को 63 घोषित विदेशी नागरिकों, जिनकी राष्ट्रीयता ज्ञात है, के निर्वासन की प्रक्रिया दो सप्ताह के भीतर शुरू करने का निर्देश दिया गया था।
 
रेत माफिया की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर एमपी पुलिस के हमला मामले की सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
 सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश के दो पत्रकारों की याचिका पर सुनवाई करने के लिए राजी हो गया जिन पर स्थानीय रेत माफिया की रिपोर्टिंग करने पर पुलिस ने कथित रूप से हमला किया था। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के समक्ष मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया था।
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याचिकाकर्ता पत्रकारों के वकील ने पीठ को बताया कि मध्य प्रदेश के एक स्थानीय पुलिस थाने में दो पत्रकारों की पिटाई की गई। यह घटना एक महीने पहले की है और घटना के बाद पत्रकार दिल्ली चले आए थे। वे रेत माफिया के खिलाफ रिपोर्टिंग कर रहे थे। यह बहुत गंभीर मामला है। थाने में उनकी पिटाई की गई। अब उन्होंने सुरक्षा की मांग की है। वकील ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को भिंड पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए जाने की आशंका है।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि आप हाईकोर्ट क्यों नहीं गए? जब वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता फिलहाल दिल्ली में हैं तो पीठ ने पूछा कि तो क्या हमें अग्रिम जमानत के लिए अखिल भारतीय मामलों पर विचार करना चाहिए, क्योंकि इसमें पत्रकार शामिल है? वकील ने दावा किया कि याचिकाकर्ताओं की जान खतरे में है और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी घटना की निंदा की है। पीठ ने फिर पूछा कि आप आज ही सीधे हाईकोर्ट क्यों नहीं जाते? वकील ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के पास हाईकोर्ट जाने के लिए साधन नहीं हैं। उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इसके बाद पीठ ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

असम में महिला की 'अवैध' हिरासत पर याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट सहमत
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया। इस याचिका में उसकी मां को असम पुलिस द्वारा कथित रूप से अवैध हिरासत में लिये जाने का आरोप लगाया गया है। 26 वर्षीय युनूस अली ने अपनी मां मोनोवारा बेवा की तत्काल रिहाई की मांग की, जिन्हें कथित तौर पर 24 मई को धुबरी पुलिस स्टेशन में बयान दर्ज करने के बहाने बुलाकर हिरासत में लिया गया था।

याचिका में बंदी को किसी भी भारतीय सीमा पार भेजने या "वापस भेजने" पर रोक लगाने का निर्देश देने की भी मांग की गई।  न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इस पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की।
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