सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न) संशोधन अधिनियम, 2018 पर रोक लगाने से फिर इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में शीर्ष कोर्ट के 20 मार्च, 2018 के फैसले के खिलाफ दाखिल केंद्र की पुनर्विचार याचिका और नए कानून के खिलाफ दाखिल जनहित याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है।
जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की पीठ ने कहा, हम संशोधित कानून पर फिलहाल रोक नहीं लगा सकते। इस मामले पर विस्तार से सुनवाई जरूरी है। इसके साथ ही सुनवाई 19 फरवरी तक के लिए टाल दी गई। 24 जनवरी को भी कोर्ट ने संशोधित कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
शीर्ष कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के प्रति दुरुपयोग की घटनाओं का जिक्र करते हुए 20 मार्च को फैसला दिया था कि एससी-एसटी एक्ट में शिकायत पर तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी। अन्य निर्देशों के साथ कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस कानून के तहत दर्ज मामलों में लोक सेवक को सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बाद ही गिरफ्तार किया जा सकता है।
सरकार ने इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका लगाई थी और संसद के मानसून सत्र में कानून में संशोधन कर पहले की स्थिति बहाल कर दी थी। इसके खिलाफ कोर्ट में जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं।