सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को टीआरपी मामले की जांच सीबीआई से कराने की रिपब्लिक टीवी की आग्रह वाली याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और चैनल को बॉम्बे हाईकोर्ट जाने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा, हमें हाईकोर्टों पर यकीन रखना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा, चैनल को जांच का सामना करने वाले किसी भी दूसरे आम नागरिक की तरह पहले बॉम्बे हाईकोर्ट जाना चाहिए।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा, आप पहले बॉम्बे हाईकोर्ट क्यों नहीं गए? मीडिया हाउस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने इस मामले में हो रही जांच को लेकर आशंका जताई। तब पीठ ने कहा, आपके मुवक्किल का ऑफिस मुंबई स्थित वर्ली में है। आपको बॉम्बे हाईकोर्ट जाना चाहिए। हाईकोर्ट के बिना इस याचिका पर विचार करने से संदेश जाएगा कि हमें हाईकोर्टों पर विश्वास नहीं है।
पीठ ने कहा, कोरोना महामारी के दौरान भी हाईकोर्ट लगातार काम करते रहे और मीडिया समूह को वहीं जाना चाहिए। जस्टिस चंद्रचूड़ ने साथ ही हाल के समय में पुलिस अधिकारियों के मीडिया को इंटरव्यू देने पर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा, हम इन दिनों पुलिस कमिश्नरों के इंटरव्यू देने के चलन से चिंतित हैं। इसके बाद रिपब्लिक टीवी ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली।
मुंबई पुलिस ने किया याचिका का विरोध
मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी की याचिका का यह कहते हुए विरोध किया था कि चैनल पुलिस जांच को रुकवाने की कोशिश कर रहा है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में देर रात दायर अपनी एक याचिका में कहा, रिपब्लिक टीवी का जांच को सीबीआई को सौंपने की मांग गलत है। वह टीआरपी रेटिंग्स में घपले की जांच रुकवाना चाहता है।
मीडिया ट्रायल स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के खिलाफ है। अर्णब गोस्वामी ऐसे कार्यक्रम पेश कर रहे हैं जिसमें इस मामले पर विस्तार से बहस होती है, गवाहों से संपर्क किया जाता है और उनके साथ हस्तक्षेप और डराया धमकाया जाता है। मुंबई पुलिस टीआरपी रेटिंग्स के साथ कथित छेड़छाड़ के इस मामले में रिपब्लिक टीवी के अलावा दो अन्य चैनलों फखत मराठी और बॉक्स सिनेमा की भी जांच कर रही है।