सुप्रीम कोर्ट ने बहुविवाह और 'निकाह हलाला' की इस्लामी प्रथा को चुनौती देने वाले वकील और भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायधीश एसए बोबडे की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि हम सर्दियों की छुट्टियों के बाद इस मामले को देखेंगे। ये मामला सुप्रीम कोर्ट ने संविधान पीठ को भेज दिया है।
क्या है निकाह हलाला?
अगर मौजूदा मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रावधानों को देखें तो इनके मुताबिक अगर किसी मुस्लिम महिला का तलाक हो चुका है और वह उसी पति से दोबारा निकाह करना चाहती है, तो उसे पहले किसी और शख्स से शादी कर एक रात गुजारनी होती है। इसे निकाह हलाला कहते हैं।
भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने बहुविवाह, निकाह हलाला, निकाह मुताह (शियाओं के बीच अस्थायी विवाह) और निकाह मिस्यार (सुन्नियों के बीच अल्पकालिक विवाह) की प्रथा को चुनौती देते हुए उनकी याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करते हैं।
अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है, अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को रोकता है और अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है।