सुप्रीम कोर्ट ने लैंगिक संवेदनशीलता और आंतरिक शिकायतों के लिए समिति का गठन किया है। आदेश में कहा गया है कि 'सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया रेगुलेशनंस, 2013 के क्लॉज 4(2) के तहत लैंगिक संवेदनशीलता और महिलाओं के यौन उत्पीड़न की शक्ति का इस्तेमाल करते हुए इसके प्रावधानों को लागू किया जाता है। मुख्य न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट लैंगिक संवेदनशीलता और आंतरिक शिकायत समिति का गठन किया है।'
12 सदस्यों वाली समिति की अध्यक्षता जस्टिस हिमा कोहली करेंगी। समिति में जस्टिस बीवी नागरत्ना, एडिश्नल रजिस्ट्रार सुखदा प्रीतम, वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा और महालक्ष्मी पावनी भी पैनल में शामिल हैं। वहीं समिति के सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के वकील और प्रतिनिधि, सौम्यजीत पाणी, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड अनिंदिता पुजारी, वकील मधु चौहान, प्रोफेसर श्रुति पांडे, वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता और मेनका गुरुस्वामी और लेनी चौधरी आदि शामिल हैं।
दिल्ली सरकार की याचिका पर 3 जून को होगी सुनवाई
दिल्ली सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 3 जून को सुनवाई करेगा। दिल्ली सरकार की याचिका में हरियाणा को दिल्ली को दिए जाने वाले अतिरिक्त पानी को जारी करने की मांग की है ताकि राजधानी दिल्ली में चल रहे जलसंकट से निपटा जा सके। दिल्ली की जल मंत्री आतिशी ने यह याचिका दायर की है। याचिका में पानी तक पहुंच को लोगों का बुनियादी मानवाधिकार बताया है।
याचिका में कहा गया है, 'पानी तक पहुंच किसी व्यक्ति के बुनियादी मानवाधिकारों में से एक है। पानी न केवल जीवनयापन के लिए जरूरी है, बल्कि पानी तक पहुंच संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत गरिमा और जीवन की गुणवत्ता की गारंटी का एक अनिवार्य घटक भी है।' याचिका में कहा गया है, 'वर्तमान जल संकट, जो गर्मियों के चरम पर होने और पानी की निरंतर कमी के कारण और भी बदतर हो सकता है, दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों के सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन करता है, जो पर्याप्त स्वच्छ पेयजल तक भी नहीं पहुँच पा रहे हैं।' याचिका में हरियाणा सरकार को वजीराबाद बैराज से तत्काल और निरंतर पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जल संकट को कम किया जा सके।