उच्चतम न्यायालय विधानसभा की 15 सीटों पर हो रहे उपचुनाव में लड़ने की अनुमति दिए जाने के संबंध में कर्नाटक के अयोग्य घोषित 17 विधायकों की याचिका पर सुनवाई के लिए सोमवार को राजी हो गया। न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि उपचुनाव लड़ने के लिए अंतरिम राहत का अनुरोध करने वाले अयोग्य विधायकों के आवेदन पर 25 सितंबर को सुनवाई की जाएगी।
अयोग्य घोषित किए गए विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार के आदेश के अनुसार ये व्यक्ति वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल के दौरान चुनाव नहीं लड़ सकते। विधानसभा का कार्यकाल 2023 में पूरा होगा।
इस बीच, निर्वाचन आयोग का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने पीठ से कहा कि विधानसभा की 15 रिक्त सीटों के लिए उपचुनाव की अधिसूचना जारी की गई है और न्यायालय को चुनाव पर रोक नहीं लगानी चाहिए। आयोग के वकील ने कहा कि इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने का अध्यक्ष का आदेश इन्हें उपचुनाव लड़ने के उनके अधिकार से वंचित नहीं कर सकता।
तत्कालीन अध्यक्ष ने इन विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था जिसके परिणामस्वरूप राज्य में एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार गिर गई थी। सदन में विश्वास मत प्राप्त करने में असफल रहने पर कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद भाजपा नेता बी एस येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा सरकार का गठन हुआ। अयोग्य घोषित किए गए विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है।
इनमें से कुछ विधायकों ने कुमार के फैसले को मनमाना और गैरकानूनी बताते हुए अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय से पहले ही स्वेच्छा से विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।