सुप्रीम कोर्ट ने तहलका मैगजीन के संस्थापक संपादक तरुण तेजपाल से पूछा कि अगर उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप झूठा है, तो उन्होंने सहकर्मी से माफी क्यों मांगी? दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष तेजपाल के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल पर लगे आरोप में कोई सच्चाई नहीं है। इस पर पीठ ने पूछा यदि आरोप झूठे थे, तो उन्होंने उस घटना के बाद पत्र लिखकर अपने सहकर्मी से माफी क्यों मांगी थी। कुछ नहीं हुआ तो माफी नहीं मांगनी चाहिए थी। कुछ तो हुआ होगा।
तेजपाल पर वर्ष 2013 में एक फाइव स्टार होटल की लिफ्ट में महिला सहकर्मी के साथ यौन शोषण का आरोप लगा था। फिलहाल वह जमानत पर हैं। तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर यौन उत्पीड़न और बंधक बनाने के आरोप निरस्त करने की गुहार लगाई है। तेजपाल के वकील विकास सिंह ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के अनुसार शिकायतकर्ता ने तेजपाल का पीछा किया था। उन्होंने कहा कि पुलिस कुछ व्हाट्सएप मैसेज छिपा रही है, जिससे साबित हो जाएगा कि आरोप गलत है।
वहीं, गोवा पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल के वकील की दलील को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न का केस चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ कई ईमेल हैं।