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SC: अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मामले में एसआईटी की जांच पर 'सुप्रीम' सवाल; कोर्ट ने कहा- यह दिशा से भटकी

Wed, 16 Jul 2025 02:02 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हरियाणा पुलिस ने ऑपरेशन सिंदूर पर उनके पोस्ट को लेकर दर्ज की गई एफआईआर के बाद 18 मई को महमूदाबाद को गिरफ्तार किया था। एफआईआर में कथित तौर देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरा बताया गया था।
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प्रोफेसर केस में 'सुप्रीम' सुनवाई (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऑपरेशन सिंदूर पर सोशल मीडिया पोस्ट के लिए गिरफ्तार अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के मामले में हरियाणा एसआईटी की जांच की दिशा पर सवाल उठाया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच दिशा भटक गई है। 

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जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की अध्यक्षता वाली हरियाणा एसआईटी से कहा कि वह अली खान महमूदाबाद के खिलाफ उनके विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट पर दर्ज दो एफआईआर तक ही सीमित रहे और यह देखे कि क्या कोई अपराध हुआ है। इसके अलावा वह चार हफ्तों में अपनी रिपोर्ट पेश करे।

पीठ ने क्या कहा?

  • पीठ ने कहा कि एसआईटी के लिए महमूदाबाद के मोबाइल फोन सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जांच के लिए जब्त करने का कोई कारण नहीं था। अदालत ने कहा कि चूंकि महमूदाबाद जांच में सहयोग कर रहे थे, इसलिए उन्हें दोबारा तलब करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • पीठ ने कहा, हम जानना चाहते हैं कि एसआईटी खुद को गलत दिशा में क्यों ले जा रही है। उनसे पोस्ट की विषयवस्तु की पड़ताल करने की अपेक्षा की जाती है। पीठ ने कहा कि वह जांच में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। लेकिन कोर्ट ने मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त किए जाने पर सवाल उठाया।
  • पीठ ने एसआईटी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से कहा कि एसआईटी यह कह सकती है कि प्राथमिकी की विषय-वस्तु किसी अपराध का खुलासा नहीं करती है और इस मामले को बंद किया जा सकता है। वह हमेशा कह सकती है कि जांच के दौरान उन्हें कुछ ऐसी सामग्री मिली है जो अलग मामला बनाती है और कानून अपना काम करेगा।

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जमानत की शर्तों में दी थी ढील
शीर्ष अदालत ने 21 मई को प्रोफेसर की जमानत की शर्तों में भी ढील दी थी और उन्हें अदालत में विचाराधीन मामले को छोड़कर, पोस्ट, लेख लिखने और कोई भी राय व्यक्त करने की अनुमति दी थी। हालांकि, अदालत ने उनके खिलाफ जांच पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया था। उसने तीन सदस्यीय एसआईटी को महमूदाबाद के खिलाफ प्राथमिकियों की पड़ताल करने का निर्देश दिया था।

महमूदाबाद के खिलाफ दो एफआईआर
हरियाणा पुलिस ने ऑपरेशन सिंदूर पर महमूदाबाद के पोस्ट को लेकर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उन्हें 18 मई को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उनके पोस्ट ने देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डाला। सोनीपत जिले में पुलिस ने दो प्राथमिकियां दर्ज की थीं। एक प्राथमिकी हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया की शिकायत के आधार पर और दूसरी प्राथमिकी एक ग्राम सरपंच की शिकायत पर दर्ज की गई थी।

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