सार
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से कहा कि वह चाहे तो अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति न देने पर उदारता से विचार कर सकती है। मामला ऑपरेशन सिंदूर पर सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है। कोर्ट ने साफ किया कि राहत मिलने पर प्रोफेसर को भविष्य में जिम्मेदार व्यवहार करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से कहा कि वह चाहे तो उदारता दिखाते हुए अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति न देने पर विचार कर सकती है। महमूदाबाद के खिलाफ यह मामला ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में किए गए सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सरकार ऐसी उदारता दिखाती है, तो महमूदाबाद को भी भविष्य में जिम्मेदार आचरण करना होगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पूछा कि क्या सरकार अभियोजन की स्वीकृति देने के पक्ष में नहीं है। हरियाणा सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने बताया कि अभियोजन स्वीकृति का मामला अभी लंबित है, जबकि चार्जशीट 22 अगस्त 2025 को दायर की जा चुकी है। इस पर पीठ ने पूछा कि स्वीकृति कितने समय से लंबित है।
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सीजेआई ने और क्या कहा?
इसके साथ ही सीजेआई ने मौखिक रूप से कहा कि अगर राज्य सरकार उदारता दिखाते हुए अभियोजन स्वीकृति न देने का निर्णय लेती है, तो अदालत मामले के मेरिट में जाने की आवश्यकता नहीं समझेगी। ऐसा होने पर यह अपेक्षा भी रहेगी कि प्रोफेसर महमूदाबाद भविष्य में बहुत जिम्मेदारी के साथ सार्वजनिक बयान दें और यह न समझें कि मामला समाप्त होते ही वे कुछ भी लिखने के लिए स्वतंत्र हो गए हैं।
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वहीं महमूदाबाद की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस पर सहमति जताई। एएसजी राजू ने राज्य सरकार से इस संबंध में स्पष्ट निर्देश लेने के लिए समय मांगा। जिसके बाद अदालत ने मामला छह सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध किया और कहा कि तब तक अंतरिम आदेश लागू रहेगा।