सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आगाह किया कि पर्याप्त आधार के बिना राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने से राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप लगते हैं। यह कहते हुए शीर्ष अदालत ने समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता यूसुफ मलिक के खिलाफ लगाए गए रासुका के आरोप को खारिज कर दिया।
जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने रामपुर जेल से मलिक की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। पीठ ने राज्य सरकार को नगरपालिका कर वसूली के मामले में राजनेता के खिलाफ रासुका लगाने के लिए फटकार लगाई। पीठ ने मंगलवार को कहा, 'राजस्व बकाया की वसूली के लिए रासुका लगाने पर हम चकित हैं। हमारा मानना है कि यह स्पष्ट रूप से दिमाग नहीं लगाने का मामला है। इसलिए हम रासुका को रद्द करते हैं व निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता को तुरंत रिहा किया जाए।'
शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सूचना को रामपुर जिला न्यायाधीश को अविलंब भेजें ताकि मलिक को जेल से रिहा किया जा सके। सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सरकार द्वारा पिछली सुनवाई पर अदालत के सुझाव के बावजूद मलिक के खिलाफ रासुका वापस नहीं लेने पर नाराजगी व्यक्त की।
पीठ ने कहा, 'क्या यह एनएसए का मामला है? यही कारण है कि राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप सामने आते हैं। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील से कहा कि राज्य को इसे स्वयं वापस लेना चाहिए था। पीठ ने कहा, 'हमने आपको पिछली तारीखों पर आगाह किया था लेकिन आपने इसे वापस नहीं लिया। हमने केवल रासुका को खारिज किया है और अपने आदेश में और कुछ नहीं कहा है लेकिन यही कारण है कि सभी तरह के राजनीतिक आरोप लगाए जाते हैं।' सपा नेता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील एसडब्ल्यूए कादरी ने पीठ से कोर्ट के आदेश को तुरंत प्रसारित करने का अनुरोध किया ताकि मलिक को रिहा किया जा सके।
nजनवरी में ली थी सुप्रीम कोर्ट की शरण
सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद आजम खान के करीबी सहयोगी मलिक ने जनवरी में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसमें शिकायत की गई थी कि अप्रैल, 2022 में राज्य सरकार द्वारा रासुका लगाने के खिलाफ उनकी याचिका को कई बार आग्रह के बाद भी इलाहाबाद हाईकोर्ट नहीं सुन रहा है।
तथ्य ठोस, इसलिए जारी कर रहे नोटिस
27 जनवरी को पीठ ने कहा था कि वह आमतौर पर हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई में देरी के खिलाफ रिट याचिका पर विचार नहीं करती है लेकिन तथ्य काफी ठोस हैं जो हमें नोटिस जारी करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी कार्रवाई को ठहराया सही
राज्य सरकार ने फरवरी में इस मामले में हलफनामा दायर कर अपनी कार्रवाई को सही ठहराया था। इसमें कहा था कि मलिक के खिलाफ एक और आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा 2022 में उनके दामाद से राजस्व बकाया की वसूली को लेकर एक अतिरिक्त नगर आयुक्त को धमकी देने का मामला भी दर्ज है।