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अस्पतालों-कोचिंग में कब थमेंगे अग्निकांड?: सुप्रीम कोर्ट में कानून बनाने की मांग, याचिका की पांच बड़ी बातें

Sat, 27 Jun 2026 04:08 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

आखिर देश में बार-बार होने वाले अग्निकांडों और मासूमों की मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या सुप्रीम कोर्ट में दायर यह याचिका देश भर के कोचिंग सेंटरों, स्कूलों और अस्पतालों को सुरक्षित बनाने के लिए एक सख्त राष्ट्रीय फायर सेफ्टी कानून लागू करवा पाएगी? क्या भ्रष्टाचार करने वाले और अवैध बेसमेंट को हरी झंडी देने वाले सरकारी अफसरों को कभी जेल भेजा जाएगा?
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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देश में बार-बार होने वाले भीषण अग्निकांडों पर अब सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में केंद्र सरकार को देश भर के उच्च जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों के लिए एक राष्ट्रीय अग्नि और जीवन सुरक्षा ढांचा तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इतना ही नहीं, इस याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार पूरे देश के लिए एक मजबूत फायर सेफ्टी कानून बनाए।
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यह याचिका वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने दायर की है। उन्होंने कहा कि स्कूल, कोचिंग, हॉस्टल, होटल, रेस्तरां, मॉल और अस्पतालों के लिए एक सख्त नियम होना चाहिए। भारी भीड़ वाली इन जगहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं।

तीन महीने में क्यों न हो हर बिल्डिंग की जांच?
याचिका में सभी राज्यों को एक बड़ा निर्देश देने की मांग की गई है। वकील ने कहा कि तीन से चार महीने के भीतर सभी राज्यों में फायर ऑडिट होना चाहिए। खासकर कोचिंग हब, स्कूल, अस्पताल और मॉल की जांच पहले हो।
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हाल ही में दिल्ली और लखनऊ में दो बड़े हादसे हुए। याचिका में इन हादसों का जिक्र है। वकील ने कहा कि देश में एक जैसा कड़ा कानून नहीं है। इसी वजह से बार-बार ऐसी लापरवाही और मौतें हो रही हैं। याचिका में लिखा है, 'हादसे के बाद सिर्फ कमेटी बनाना काफी नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीने का अधिकार देता है। सरकार का काम केवल शोक मनाना नहीं, बल्कि हादसों को रोकना है।'

अवैध बेसमेंट और छतों पर कब चलेगा हथौड़ा?
याचिका में शीर्ष अदालत से कहा गया है कि सभी राज्य एक लिस्ट सौंपें। अदालत को बताया जाए कि कितनी बिल्डिंग बिना फायर एनओसी के चल रही हैं।
अवैध बेसमेंट, छतों और बिना मंजूरी वाली मंजिलों पर क्लासरूम, लाइब्रेरी, कोचिंग या रेस्तरां चलाने पर तुरंत रोक लगे। बच्चों और छात्रों की सुरक्षा सबसे ऊपर होनी चाहिए। सिंगल एग्जिट यानी एक निकास वाली जगहों पर कोचिंग चलाना बंद हो।

याचिका की पांच सबसे बड़ी बातें 
  1. राष्ट्रीय स्तर पर बने कड़ा नियम: पूरे देश के सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले परिसरों के लिए एक समान और सख्त राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा ढांचा तैयार किया जाए।
  2. तीन से चार महीने में हो विशेष ऑडिट: सभी राज्यों में स्कूल, कोचिंग, अस्पताल, होटल और मॉल का समय सीमा के भीतर सघन फायर ऑडिट हो।
  3. अवैध निर्माणों पर लगे तुरंत रोक: बिना मंजूरी के चल रहे बेसमेंट, छतों, अस्थायी ढांचों और अवैध मंजिलों पर क्लासरूम, लाइब्रेरी या रेस्तरां चलाने पर पूरी तरह पाबंदी हो।
  4. दोषी अफसरों की तय हो जवाबदेही: बिना फायर एनओसी के खतरनाक इमारतों को चलने देने वाले सरकारी अधिकारियों पर सीधे क्रिमिनल केस दर्ज किया जाए।
  5. हादसों के सबूत रखे जाएं सुरक्षित: मालवीय नगर और अलीगंज जैसे हालिया हादसों के सीसीटीवी फुटेज, एनओसी और निरीक्षण रिकॉर्ड को तुरंत सील कर सुरक्षित किया जाए।

दोषी अधिकारियों को भेजा जाए जेल
इस याचिका की सबसे बड़ी मांग भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई की है। जो अधिकारी बिना एनओसी वाली खतरनाक इमारतों को चलने देते हैं, उन पर सीधा क्रिमिनल केस दर्ज हो। उन्हें नौकरी से भी निकाला जाए। वकील ने कोर्ट से दिल्ली के मालवीय नगर और लखनऊ के अलीगंज हादसे के सारे रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है। तीन जून को दिल्ली के मालवीय नगर में लगी आग में 21 लोग मरे थे। वहीं 22 जून को लखनऊ के अलीगंज में 15 लोगों की मौत हुई थी और नौ लोग घायल हुए थे। इन हादसों के सीसीटीवी और कागजात बचाना जरूरी है ताकि सच सामने आ सके।
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