फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट में बड़ी याचिका: सिर्फ पहचान का जरिया बने आधार, नागरिकता या पते का सबूत नहीं

Wed, 20 May 2026 06:23 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

इस याचिका ने आधार के मूल उद्देश्य और उसके व्यावहारिक उपयोग के बीच के गंभीर अंतर को उजागर किया है। देश की सुरक्षा और लोकतांत्रिक शुद्धता के लिए यह बेहद जरूरी है कि पहचान और नागरिकता के बीच के कानूनी अंतर को कड़ाई से बनाए रखा जाए ताकि किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोका जा सके।
 
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश में आधार कार्ड के बढ़ते उपयोग और इसके दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल नागरिकता, निवास स्थान और पते के प्रमाण के रूप में धड़ल्ले से हो रहा है। शीर्ष अदालत से मांग की गई है कि वह केंद्र सरकार को इसे केवल पहचान पत्र के रूप में ही सीमित रखने के सख्त निर्देश जारी करे।
विज्ञापन


यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है। इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और भारत निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है कि आधार का उपयोग केवल पहचान साबित करने के लिए हो, न कि नागरिकता, अधिवास , पता या जन्मतिथि प्रमाणित करने के लिए।

कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन का दावा
अधिवक्ता अश्वनी दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में नए मतदाता पंजीकरण फॉर्म -6 में आधार के उपयोग पर गंभीर कानूनी सवाल उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आधार को जन्मतिथि और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार करना आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम , 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 के प्रावधानों के पूरी तरह खिलाफ है।
विज्ञापन


याचिका में कहा गया है कि आधार अधिनियम की धारा नौ साफ तौर पर यह बताती है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण नहीं है। इसके अलावा, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने भी 22 अगस्त 2023 की अपनी अधिसूचना में साफ किया था कि आधार केवल पहचान का प्रमाण है, नागरिकता या जन्मतिथि का नहीं।

यह भी पढ़ें: SC Updates: महिला वकीलों के प्रतिनिधित्व पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; सिख धार्मिक संपत्तियों पर PIL सुनने से इनकार

घुसपैठियों की ओर से दुरुपयोग की आशंका
याचिकाकर्ता ने जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए कहा कि आज स्कूलों में दाखिले, संपत्ति की खरीद, जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आधार का इस्तेमाल धड़ल्ले से उम्र और नागरिकता के प्रमाण के रूप में हो रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि इसका उपयोग नए मतदाता पहचान पत्र के आवेदन (फॉर्म-6) में भी पते और जन्मतिथि के रूप में किया जा रहा है। याचिका में डर जताया गया है कि इस ढिलाई का फायदा उठाकर घुसपैठिए और अवैध अप्रवासी भी आधार के जरिए विभिन्न सरकारी दस्तावेज हासिल कर रहे हैं।
विज्ञापन


चुनावी प्रक्रिया और सत्यापन तंत्र में सुधार की मांग
याचिका में दलील दी गई है कि फॉर्म-6 के तहत वर्तमान सत्यापन प्रणाली बेहद कमजोर है। इसके कारण उचित सहायक दस्तावेजों के बिना भी लोग मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं, जिससे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होने का खतरा है। सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि चुनावी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले सत्यापन की व्यापक समीक्षा की जाए। इसके साथ ही, इन सुधारों की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की जाए, जिसमें साइबर सुरक्षा और फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल हों।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें