फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट : बंगाल सरकार बोली- चुनाव बाद हिंसा के आरोप निराधार, जुर्माना लगाकर खारिज की जाए याचिका

Mon, 14 Jun 2021 06:39 PM IST
योगेश साहू राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- आरोप निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि याचिका को जुर्माने के साथ खारिज किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
Supreme Court - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद हिंसा के कारण लोगों के कथित विस्थापन पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका का कड़ा विरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में हुई हिंसा के प्रत्येक कृत्य को चुनाव के बाद की हिंसा के रूप में नहीं देखा जा सकता।

विज्ञापन


हलफनामे में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका राजनीति से प्रेरित है। याचिका विशुद्ध रूप से पश्चिम बंगाल में कानून और व्यवस्था की स्थिति के संबंध में वास्तविक परिस्थितियों से अदालत को गुमराह करने के लिए दायर की गई है। 

हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा है कि चुनाव आयोग की देखरेख में हुए चुनाव के बाद सत्ताधारी दल के लोकतांत्रिक रूप से चुने जाने के बाद राज्य में लोकतंत्र की हत्या और फासीवाद व मानवीय संकट आदि जैसे निराधार आरोप लगाना अपमानजनक है। राज्य सरकार ने कहा है कि इस तरह के निराधार आरोप राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से लगाए जाते हैं, लिहाजा इस याचिका को जुर्माने के साथ खारिज किया जाना चाहिए।
विज्ञापन


दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में अरुण मुखर्जी समेत पांच लोगों ने एक याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद होने वाली हिंसा के कारण कथित तौर पर बड़ी संख्या में हो रहे विस्थापन की जांच एसआईटी से कराने की मांग की थी। इस पर गत 25 मई को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार समेत अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। अब इसी नोटिस के जवाब में राज्य सरकार ने हलफनामा दायर कर उक्त सभी बातें कही हैं।

इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार 15 जून को होगी। बहरहाल, याचिका में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद होने वाली हिंसा के कारण राज्य में लोगों का सामूहिक पलायन और आंतरिक विस्थापन हुआ है। पुलिस और 'राज्य प्रायोजित गुंडे' आपस में मिले हुए हैं। यही वजह है कि पुलिस मामलों की जांच नहीं कर रही है और उन लोगों को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही है, जो जान का खतरा महसूस कर रहे हैं। 

याचिका में कहा गया है कि इस डर और भय की वजह से लोग विस्थापित होने या पलायन करने को मजबूर हैं। वे पश्चिम बंगाल के भीतर और बाहर आश्रय गृहों या शिविरों में रहने के लिए मजबूर हैं। याचिका में एक लाख से अधिक लोग विस्थापन का दावा किया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें