पालघर लिंचिंग मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं थी, जिन पर अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। कोर्ट ने याचिकाओं को लिस्ट करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच को याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि राज्य सरकार भी पालघर लिंचिंग मामले की सीबीआई जांच कराने के पक्ष में है।
महाराष्ट्र सरकार ने भी दी सहमति
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह पालघर लिंचिंग मामले की जांच सीबीआई को सौंपने को तैयार है। इससे पहले राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह घटना के दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी लेकिन सीबीआई को घटना की जांच वाली याचिका खारिज करने की अपील की थी। बता दें कि अप्रैल 2020 में तीन लोग कार में सवार होकर मुंबई के कांदिवली से गुजरात के सूरत एक अंत्येष्टि कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। कोरोना महामारी के कारण देश में लॉकडाउन लागू था। जब इनकी गाड़ी पालघर के गढ़चिंचली गांव पहुंची तो लोगों ने उन्हें बच्चा चोर समझकर पीटना शुरू कर दिया। हैरानी की बात ये है कि इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही और लोगों की भीड़ ने दो साधुओं समेत तीन लोगों की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी।
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इस घटना में शुरू से ही सीबीआई जांच की मांग की जा रही थी। श्री पंच दासबन जूना अखाड़ा और मृतकों के परिजनों ने लिंचिंग की इस घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में पुलिस पर पक्षपातपूर्ण तरीके से जांच करने के आरोप लगाए गए हैं। इनके अलावा भी कुछ वकीलों ने घटना की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की हुई है।
रामसेतु को राष्ट्रीय विरासत स्थल घोषित करने की मांग
पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर राम सेतु को राष्ट्रीय विरासत स्थल घोषित करने की मांग की है। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में केंद्र सरकार को निर्देश दे। सुप्रीम कोर्ट स्वामी की इस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेपी पारदीवाला की पीठ ने याचिका पर संज्ञान लिया है। स्वामी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बीते नौ सालों से इसमें देरी कर रही है।
लिव इन संबंधों के पंजीकरण की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन संबंधों के पंजीकरण की मांग वाली याचिका को मूर्खतापूर्ण विचार बताकर खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या वह लिव इन में रहने वाले लोगों की सुरक्षा बढ़ाना चाहते हैं या फिर चाहते हैं कि वह लिव इन संबंधों में ना रहें। कोर्ट ने कहा कि लिव इन संबंधों के पंजीकरण का केंद्र से क्या लेना-देना है? यह मूर्खतापूर्ण विचार है। कोर्ट ने ये भी कहा कि अब समय आ गया है कि कोर्ट ऐसी याचिकाओं को दायर करने वालों पर जुर्माना भी लगाए।
याचिका में मांग की गई थी कि लिव इन रिश्तों के पंजीकरण के नियम और दिशा निर्देश बनाने का आग्रह किया गया था। लोगों को लिव इन में रहने के लिए एक दूसरे की वैवाहिक स्थिति, आपराधिक इतिहास और अन्य प्रासंगिक विवरणों के बारे में सटीक जानकारी देने के निर्देश दिए जाएं।