Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा से जुड़े एक ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच का आदेश दिया है, जो कथित रूप से पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से जुड़ा बताया जा रहा है। एनएफएसयू को आवाज की तुलना और उसमें किसी तरह की एडिटिंग या छेड़छाड़ की जांच करने को कहा गया है। पढ़िए रिपोर्ट-
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा से जुड़े एक ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच कराने का आदेश दिया। यह क्लिप राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से जुड़ा बताया जा रहा है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू), गांधीनगर को निर्देश दिया कि वह ऑडियो रिकॉर्डिंग का विश्लेषण कर इसमें मौजूद आवाज की तुलना बीरेन सिंह के स्वीकृत वॉइस सैंपल से करे।
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याचिकाकर्ता संगठन कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि दो घंटे 36 मिनट की पूरी ऑडियो क्लिप रिकॉर्ड पर रखी गई है। अदालत ने कहा कि मूल डिवाइस से कॉपी की गई इस ऑडियो को पेन ड्राइव के जरिये दूसरे पक्ष को उपलब्ध कराया जाए, जिसे आगे जांच के लिए एनएफएसयू भेजा जाएगा।
इससे पहले सात जनवरी को भी शीर्ष अदालत ने 48 मिनट की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने निर्देश दिया था कि सभी उपलब्ध ऑडियो क्लिप्स और बीरेन सिंह की आवाज के नमूने को जांच के लिए भेजा जाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने एनएफएसयू से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या ऑडियो क्लिप्स में किसी प्रकार की एडिटिंग, छेड़छाड़ या बदलाव किया गया है और क्या उनमें मौजूद आवाज एक ही व्यक्ति की है।
चुनिंदा क्लिप्स भेजे जाने पर कोर्ट जताई थी नाराजगी
इस मामले में अदालत ने पहले भी यह कहते हुए नाराजगी जताई थी कि जांच के लिए केवल चुनिंदा क्लिप्स ही भेजे गए थे। मई 2023 में मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग विस्थापित हुए थे।
याचिकाकर्ता ने क्या आरोप लगाए हैं?
याचिकाकर्ता संगठन ने स्वतंत्र एसआईटी जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि ऑडियो में राज्य तंत्र की हिंसा में संलिप्तता के संकेत मिलते हैं। वहीं, पहले की एक रिपोर्ट में एनएफएसयू ने ऑडियो क्लिप्स में छेड़छाड़ की बात कही थी।