फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट का आदेशः सिनेमा हॉल में फिल्म से पहले बजेगा राष्ट्रगान, खड़े होंगे दर्शक

Wed, 30 Nov 2016 10:09 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
अब देशभर के सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजेगा और मौजूद दर्शकों को राष्ट्रगान को सम्मान देने के लिए खड़े होना होगा। इस दौरान सिनेमाघरों के तमाम दरवाजे बंद होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि इस पहल से लोगों में देशभक्ति और राष्ट्रवाद का भाव प्रबल होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दस दिनों के भीतर प्रभावी करने के लिए कहा है। साथ ही शीर्ष अदालत ने राष्ट्रगान के व्यावसायिक इस्तेमाल और इसके नाट्य रूपांतरण पर भी रोक लगा दी है।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ ने कहा है कि अब समय आ गया है कि लोग अपनी मातृभूमि के प्रति स्नेह दिखाएं। पीठ ने कहा, लोगों को यह अहसास होना चाहिए कि यह हमारा देश है। यह मेरी मातृभूमि है। पहले हम भारतीय हैं। पीठ ने कहा कि दूसरे देशों में आप वहां के कायदे मानते हैं लेकिन आप भारत में किसी तरह की पाबंदी नहीं चाहते। पीठ ने कहा है कि सिनेमा हॉल में जब राष्ट्रगान चलाया जाए तो स्क्रीन पर राष्ट्रीय ध्वज दिखे।

शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रिवेंशन ऑफ इनसल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 के तहत हर नागरिक का यह दायित्व है कि जब राष्ट्रगान चल रहा हो तो उसका सम्मान करे। पीठ ने कहा कि लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज का सम्मान किया जाना चाहिए। राष्ट्रगान संविधान में निहित राष्ट्रभक्ति का द्योतक है ओर पूरे राष्ट्र की मूल भावना है। इसका व्यक्तिगत सोच व अधिकारों से कोई सरोकार नहीं है।
विज्ञापन


साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि न तो प्रत्यक्ष रूप से और न ही परोक्ष रूप से व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज का इस्तेमाल हो। कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रगान का किसी तरह का नाट्य रूपांतरण नहीं होना चाहिए और किसी भी शो में इसका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। राष्ट्रगान या उसके किसी हिस्से को किसी चीज पर प्रिंट नहीं किया जाना चाहिए। इसका प्रदर्शन उस जगहों पर न हो जहां सम्मान पर आंच आने की आशंका हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब राष्ट्रगान गाया जाता है तो प्रोटोकॉल का सिद्धांत इससे जुड़ा होता है और इसमें राष्ट्रीय पहचान, राष्ट्रीय अखंडता और संवैधानिक देशभक्ति निहित होती है।

शीर्ष अदालत ने इस आदेश की प्रति सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तक पहुंचाने के लिए कहा है। साथ ही कहा कि इस आदेश को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में छापा और दिखाया जाए, जिससे कि लोगों को पता चल सके कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा आदेश पारित किया है। अदालत भोपाल के इंजीनियर श्याम नारायण चौकसी द्वारा जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में राष्ट्रगान के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने की गुहार की गई है। साथ ही इसके व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की गुहार की गई है।
विज्ञापन

राष्ट्रगान पर फैसले का भाजपा ने किया स्वागत

- फोटो : AmarUjala
राष्ट्रगान पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा ने कहा है कि इससे न सिर्फ देश में राष्ट्रवाद की भावना मजबूत होगी, बल्कि एक भारत श्रेष्ठï भारत के विचार को भी मजबूती मिलेगी। फैसले को ऐतिहासिक करार देते हुए पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय भावना मजबूत होने से भारत का विश्वगुरू बनने का सपना भी पूरा होगा।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में सिनेला हॉलों में फिल्म के चलने से पहले राष्ट्रीय गान बजाना अनिवार्य कर दिया है। शर्मा ने निर्णय को बेहतरीन और दूरगामी असर डालने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि राष्टगान को अनिवार्य किए जाने से देशप्रेम की भावना बढ़ेगी। देश की एकता-अखंडता को और मजबूती मिलेगी। चूंकि निर्णय सर्वोच्च अदालत का है इसलिए इस फैसले पर कोई मीन मेख भी नहीं निकाल पाएगा।

उन्होंने कहा कि विश्वगुरू बनने के लिए मजबूत राष्ट्रीय भावना की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च अदालत ने दो टूक शब्दों में राष्टगान को हर हाल में सम्मान देने का निर्देश दिया है। ऐसे में इस आदेश से पहले जो लोग राष्ट्रगान के समय खड़े नहीं होते थे, उन्हें अब अनिवार्य रूप  से सम्मान प्रदर्शित करना होगा।

ओवैसी ने निर्देशों का स्वागत किया तो सवाल भी उठाए
ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन (एमआईएम) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रगान पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देर्शों का स्वागत किया है लेकिन इससे देशभक्ति बढ़ने पर संदेह जताया है। ओवैसी ने संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों से संबंधित कानून और राष्ट्रगान के संबंध में गृह मंत्रालय की एडवाइजरी में लोगों के खड़े होने का जिक्र नहीं है। लिहाजा सरकार को इसमें भी बदलाव करना होगा। ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश दुरुस्त हैं और इनका पालन होना चाहिए। लेकिन उन्होंने सवाल किया कि इससे राष्ट्रवाद बढ़ेगा या देशभक्ति।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें