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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा : श्रमिकों का डेटाबेस बनाएं, किसी भी मजदूर को राशन से वंचित न रखें

Mon, 24 May 2021 12:54 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पिछले दिनों शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से कहा था कि वह उन प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था करें जो अपने घर जाना चाहते हैं। प्रशासन और पुलिस आपस में इसके लिए सहयोग करें। 
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सुप्रीम कोर्ट
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान प्रवासी मजदूरों के जीवन यापन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से उनके द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह चाहता है कि दिल्ली-एनसीआर ही नहीं बल्कि सभी राज्यों को मजदूरों के लिए मुफ्त ड्राई राशन, कम्युनिटी किचन आदि की व्यवस्था की गई या नहीं। साथ ही इन राज्यों और केंद्र सरकार से कहा है कि जो भी प्रवासी मजदूर अपने गांव लौटना चाहते हैं उनके लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की गई नहीं। शाम तक सुप्रीम कोर्ट इस पर आदेश पारित करेगा। 
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 शीर्ष कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से विस्तार से जानकारी मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने आपदा प्रबंधन कानून के तहत राहत कार्यों में शामिल लोगों सहित कोरोना वायरस से मरने वालों के परिवारों को 4 लाख रुपए के अनुग्रह राशि के भुगतान पर भी केंद्र से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा कि कोरोना से मरने वाले लोगों को केंद्र ने सहायता राशि पहुंचाई या नहीं इस पर विस्तार से जानकारी दें।  इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर दिशानिर्देश बताने के लिए कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मृत्यु प्रमाणपत्र जारी का एकसमान दिशानिर्देश होना चाहिए। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, यूपी और हरियाणा सरकार से कहा है कि वह उन प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था करें जो अपने घर जाना चाहते हैं। प्रशासन और पुलिस आपस में इसके लिए सहयोग करें। 
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प्रवासी मजदूरों की समस्या पर दायर की गई थी याचिका
बता दें कि पिछले महीने अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट में प्रवासी मजदूरों की समस्या को लेकर याचिका दायर की गई थी। याचिका में बताया गया था कि कोरोना की दूसरी लहर में दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले प्रवासी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया। 
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