सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी विचाराधीन कैदी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने जीएसटी मामले में आरोपी अमित मेहरा को जमानत देते हुए बातें कही। आइए मामले को विस्तार से जानते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कहा है कि किसी विचाराधीन कैदी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए जीएसटी से जुड़े एक मामले में आरोपी अमित मेहरा को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और अब तक मुकदमे की शुरुआत भी नहीं हो पाई है, ऐसे में लगातार कारावास न्यायसंगत नहीं है।
जमानत पर क्या शर्तें होंगी?
सुप्रीम कोर्ट ने अमित मेहरा को निचली अदालत द्वारा तय की जाने वाली शर्तों के तहत जमानत देने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जीएसटी विभाग अपने हितों की सुरक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शर्त चाहता है, तो वह निचली अदालत के समक्ष आवेदन कर सकता है, जिस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।