जनहित याचिकाओं की बौछार पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि हमारे पास और भी काम है। शुक्रवार को एक के बाद कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास कई अन्य गंभीर मुद्दे भी हैं जिनका हमें निपटारा करना है। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा कि जनहित याचिका गरीबों के लिए है। काफी संख्या में लोग जेलों में बंद हैं। बहुत सारे वकील हैं जो महत्वपूर्ण मसले पर जल्द सुनवाई का आग्रह कर रहे हैं।
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियम को चुनौती देने वाली विदेश में रह रहे भारतीय नागरिक दिनेश ठाकुर की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि क्या इस तरह की याचिका दाखिल करना लोकप्रियता हासिल करना नहीं है। दूर बैठा कोई कार्यकर्ता जनहित याचिका दाखिल कर देता है। चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता के ‘लोकस स्टेंडाइ’ यानी नियत पर सवाल उठाया। पीठ ने कहा हम जनहित याचिका के दायरे को नहीं बढ़ाना चाहते। पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
पीठ ने कहा कि यहां लोग कष्ट में हैं और अकादमिक मसले को उठा रहे हैं। पीठ ने कहा कि क्या आपको लगता है कि अदालत के पास और कोई काम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का कुछ ऐसा ही रुख तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों को नियंत्रण करने, इंडिया को भारत कहने और सिख दंगों से संबंधित मामले की जांच में तेजी लाने की गुहार संबंधी जनहित याचिकाओं पर था।