बालू खनन में लगे ट्रैक्टर(प्रतीकात्मक तस्वीर)
याचिका में कहा गया था कि देश में अवैध रूप से चल रहे बालू खनन के कारण पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इससे आसपास के कारण पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित हो रहा है। याचिकाकर्ता ने पूरे देश की नदियों और समुद्री किनारों पर चल रही अवैध खनन की समस्या का मुद्दा उठाया था।
याचिकाकर्ता का दावा हे कि ईआईए अधिसूचना-2016 के मुताबिक, किसी भी प्राधिकारी को खनन की इजाजत देने से पहले एन्वायरमेंटल इंपेक्ट एसेसमेंट (ईआईए), एन्वायरमेंटल मैनेजमेंट प्लान (ईएमपी) जांचने और स्थानीय जनता से सलाह-मशविरा करने का आदेश दिया गया था। लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।
याचिकाकर्ता ने अवैध खनन के कारण घटते और प्रदूषित होते भूजल का भी मुद्दा उठाया और इसे संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जनता को मिले स्वच्छ पेयजल के अधिकार का हनन करार दिया है।