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सुप्रीम कोर्ट: 'कोई भी न्यायपालिका को धौंस नहीं दिखा सकता', राहुल के धरने का उल्लेख होने पर सीजेआई की टिप्पणी

Thu, 15 Oct 2026 12:52 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की एसआईआर से जुड़ी याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। इस दौरान सीजेआई ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का नाम लिए बिना सख्त टिप्पणी की है।
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चीफ जस्टिस सूर्यकांत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग और अन्य को एक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं द्वारा दायर एक याचिका पर दिया गया है, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी से जवाब मांगा है। 

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एक याचिकाकर्ता के आचरण पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
कोर्ट ने 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। इन याचिकाकर्ताओं ने उस तरीके को चुनौती दी है, जिससे चुनाव आयोग मतदाता सूची का 'विशेष गहन पुनरीक्षण' कर रहा है। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए, सीजेआई ने कहा, 'हम याचिकाकर्ताओं में से एक से उसके आचरण के बारे में पूछना चाहेंगे'।

'कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता'
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी और अन्य नेताओं के कथित एसआईआर अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का जिक्र होने पर सीजेआई ने कहा, 'कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता'। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत में राजनीतिक जुलूस और उसके घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि करीब 200 वकीलों ने इस तरह के दबाव बनाने के प्रयास पर चिंता जताते हुए ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ऐसी घटनाओं से अनजान नहीं है और वह एकांतवास में नहीं है, हमें पता है कि बाहर क्या हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कमजोर प्रयासों पर कोई ध्यान नहीं देता, जबकि अदालत बाहर दिए जा रहे बयानों से भी अवगत है। सुनवाई के दौरान अदालत ने असदुद्दीन ओवैसी समेत नेताओं की ओर से निर्वाचन आयोग से संबंधित दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए और समान राहत वाली याचिकाओं को एक साथ रखने का निर्देश दिया।
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याचिका में किन-किन नेताओं के नाम?
याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत सहित अन्य नेता शामिल हैं। यह याचिका 12 अक्तबूर को दायर की गई थी। शुरुआती प्रक्रियात्मक कमियों को दूर करने के बाद, 13 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसे पंजीकृत कर लिया। 

याचिका में क्या मांग की गई थी?
याचिका में इस बात की न्यायिक जांच की मांग की गई है कि क्या ये फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून, और 'टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप लिए गए हैं या नहीं। याचिका में मांगी गई मुख्य राहतों में, अदालत से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना नोटिस दिए और सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किए बिना न हटाया जाए। साथ ही, यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि हटाए गए मतदाताओं की सूची को बूथ-वार प्रकाशित किया जाए, जिसमें नाम हटाने के कारणों और मतदाताओं के जनसांख्यिकीय विवरणों का भी उल्लेख हो।

'अदालत के सामने हर आवाज कीमती' 
एसआई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर भी टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'इस अदालत के सामने हर आवाज कीमती है और सबकी बात सुनी जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की तय जगह के रूप में हटाए जाने (डी-नोटिफिकेशन) को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है।

महिला पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई न करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को उस महिला पत्रकार के खिलाफ भी कार्रवाई ना करने का आदेश दिया, जिसने दिल्ली पुलिस के एसीपी एसीपी विवेक भगत पर प्रदर्शन कवर करने के दौरान यौन हमले और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। कोर्ट ने अपने पुलिस को दिए अपने आदेश में कहा कि महिला पत्रकार के खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई न करें क्योंकि उस याचिका पर अभी विचार होना बाकी है।

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अवमानना मामले की नहीं हुई सुनवाई
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि 9 अक्तूबर को कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश की अवहेलना करने पर जिम्मेदार अफसरों ने मांगी है और कोर्ट में स्पष्टीकरण जमा किया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को स्पष्ट किया कि वह अवमानना मामले में अधिकारियों द्वारा बिना शर्त माफी मांगे जाने संबंधी मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान नहीं ले रहा है।

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