मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ चार वरिष्ठ जजों की प्रेस कांफ्रेंस का मुद्दा सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में उठा। इन जजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग वाली याचिका का कोर्ट ने संज्ञान नहीं लिया। वकील आरपी लूथरा ने
सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों के विभिन्न मामलों के आवंटन के मामले को लेकर प्रेस कांफ्रेंस के मामले को मुख्य न्यायाधीश
दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उठाया लेकिन जस्टिस मिश्रा ने नो, नो कहते हुए याचिका को ठुकरा दिया।
पीठ में उनके अलावा जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे। लूथरा ने अपनी याचिका में कहा कि लोगों के एक समूह द्वारा न्याय के मंदिर को नष्ट करने नहीं दिया जा सकता। हम देश विरोधी लोगों को संस्थान को बर्बाद करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं। इनके खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए, चाहे यह अवमानना की ही क्यों न हो। इससे पहले लूथरा ने मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (एमओपी) के बिना उच्चतर न्यायपालिका में नियुक्तियों को चुनौती दी थी।
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जजों ने अपने पत्र में लूथरा मामले का किया था जिक्र
सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कांफ्रेंस में जिस पत्र का उल्लेख किया था। उसमें मनमाने तरीके से पसंदीदा पीठ को मामले आवंटित करने के बारे में सवाल उठाने के लिए आरपी लूथरा बनाम भारत सरकार के मामले का भी जिक्र किया गया था। पिछले साल 27 अक्तूबर को दो जजों की पीठ ने उच्चतर न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति के लिए मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर को अंतिम रूप देने में देरी के मुद्दे की न्यायिक समीक्षा पर सहमति जताई थी और अटार्नी जनरल से जवाब तलब किया था। लूथरा खुद इस मामले में पेश हुए थे और उन्होंने एमओपी के अभाव में नियुक्तियों को चुनौती दी थी।