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नोएडा डीएम मेधा रूपम को राहत: शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक, क्या है पूरा मामला?

Wed, 23 Sep 2026 08:51 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।

सार

नोएडा की डीएम मेधा रूपम को आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के संबंधित हिस्सों पर रोक लगा दी है, जिसमें पांच लाख रुपये मुआवजा डीएम की सैलरी से वसूलने और उनके खिलाफ सख्त टिप्पणियां की गई थीं। 
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सुप्रीम कोर्ट से नोएडा डीएम को राहत - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम को अंतरिम राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत रद्द की गई थी और उन्हें पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने यह रकम डीएम की सैलरी से वसूलने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के उन हिस्सों पर भी रोक लगाई है, जिनमें डीएम के खिलाफ सख्त टिप्पणियां की गई थीं।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब एनएसए के तहत हिरासत की प्रक्रिया कई स्तरों से होकर गुजरी थी, तो डीएम को अकेले जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और मेधा रूपम की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रस्ताव एसएचओ, डीसीपी और कमिश्नर समेत कई स्तरों से होकर डीएम तक पहुंचा था। इसके बाद एनएसए सलाहकार बोर्ड ने भी हिरासत की समीक्षा की थी। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा, 'हम उसे अलग नहीं रख सकते, पांच लाख रुपये के जुर्माने की बात है।

आकृति चौधरी की हिरासत को लेकर क्या विवाद ?
यह मामला अप्रैल में नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान आकृति चौधरी की एनएसए के तहत हिरासत से जुड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो सितंबर को उनकी हिरासत रद्द करते हुए कहा था कि हिरासत का आदेश पर्याप्त सामग्री के बिना और उचित तरीके से विचार किए बिना पारित किया गया था। हाईकोर्ट ने पांच लाख रुपये मुआवजे का आदेश देते हुए इसकी वसूली संबंधित अधिकारियों की सैलरी से करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट के फैसले के संबंधित हिस्सों पर अंतरिम रोक लगा दी है।
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आकृति चौधरी की ओर से क्या दलीलें दी गईं?
राज्य सरकार की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा कि हिरासत का प्रस्ताव पुलिस रिपोर्ट और कई स्तरों से मिली जानकारी के आधार पर आगे बढ़ा था। उन्होंने आंदोलन के दौरान हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने का भी जिक्र किया। वहीं आकृति चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने राज्य की दलीलों का विरोध किया। उनका कहना था कि हिरासत के आधार से यह स्पष्ट नहीं होता कि आकृति ने कथित तौर पर सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी में क्या भूमिका निभाई।
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क्या मेधा रूपम को पूरी तरह क्लीन चिट मिल गई?
नहीं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली राहत अंतरिम है। अदालत ने फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के संबंधित हिस्सों के अमल पर रोक लगाई है और मामले को आगे सुनने का फैसला किया है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि मेधा रूपम को अंतिम रूप से दोषमुक्त कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट मामले के गुण-दोष पर आगे सुनवाई करेगा।
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