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Hate Speech: 'अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के भाषण नफरत फैलाने वाले नहीं', सुप्रीम कोर्ट में FIR की अपील खारिज

Fri, 01 May 2026 01:08 PM IST
Shivam Garg न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने एक तरफ जहां अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को राहत दी, वहीं हेट स्पीच को लेकर सख्त टिप्पणी भी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। ताकि न तो निर्दोष को सजा मिले और न ही अपराधी बच सके।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ कोई भी संज्ञेय अपराध नहीं बनता। यह फैसला 29 अप्रैल को जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया।

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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि:-

  • प्रस्तुत सामग्री और कथित भाषणों की जांच के बाद कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता।
  • भाषण किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं थे।
  • इनमें हिंसा या सार्वजनिक अशांति भड़काने का स्पष्ट तत्व नहीं पाया गया।

अदालत ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट का अंतिम निष्कर्ष सही था, लेकिन उसकी तर्क प्रक्रिया (सैंक्शन के आधार पर) पूरी तरह उचित नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि एफआईआर दर्ज करने के लिए पहले से सरकारी अनुमति (सैंक्शन) जरूरी नहीं है। ऐसी अनुमति की आवश्यकता केवल उस चरण में होती है, जब अदालत मामले का संज्ञान लेती है। यदि जांच शुरू करने से पहले ही सैंक्शन को अनिवार्य कर दिया जाए, तो इससे जांच प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

हेट स्पीच पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
अदालत ने कहा कि हेट स्पीच संविधान की भाईचारे की भावना के खिलाफ है और समाज की नैतिक संरचना को कमजोर करती है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि मौजूदा कानून इस मुद्दे से निपटने के लिए पर्याप्त हैं और नए कानून बनाने की जरूरत नहीं है।

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क्या था मामला?
मामला 2020 में दिल्ली के शाहीन बाग में हुए एंटी-सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए गए कथित भाषणों से जुड़ा था। अनुराग ठाकुर ने जहां 'देश के गद्दारों को...' वाली बात कही थी, वहीं प्रवेश वर्मा ने चेतावनी दी थी कि अगर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को नहीं रोका गया, तो वह आखिरकार घरों में घुसकर बलात्कार और हत्या करेंगे। जिसके बाद सीपीआई(एम) नेताओं बृंदा करात और के एम तिवारी ने आरोप लगाया था कि 27 और 28 जनवरी 2020 को अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा ने भड़काऊ भाषण दिए थे। इसके बाद उन्होंने एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 2020 में इस शिकायत को खारिज कर दिया था। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 2022 में याचिका को खारिज कर दिया।
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