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SC Updates: अदालत ने कहा- कॉलेजियम के फैसले न्यायिक समीक्षा से बाहर; CBSE से जुड़ी याचिका का किया निपटारा

Mon, 22 Jun 2026 03:40 PM IST
नितिन गौतम पीटीआई, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सऊदी अरब में रहने वाले सीबीएसई कक्षा 12 के एक निजी परीक्षार्थी की याचिका का निस्तारण कर दिया। दरअसल केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि पश्चिम एशियाई देशों में युद्ध के चलते रद्द हुई सीबीएसई परीक्षाओं से प्रभावित छात्रों के लिए नई राष्ट्रीय नीति अधिसूचित कर दी गई है। जिसके बाद अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया। 
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सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय मूल के छात्र ने याचिका दाखिल की थी। छात्र ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए कहा था कि पश्चिम एशियाई देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों के लिए विशेष मूल्यांकन योजना बनाए जाने के बावजूद उसका परिणाम रोका गया है। न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने 21 जून को जारी नई नीति को रिकॉर्ड पर लिया। साथ ही, अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के उस बयान को भी दर्ज किया, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता का परिणाम घोषित कर उसे सूचित कर दिया गया है।

सात खाड़ी देशों में रद्द हुई थीं परीक्षाएं
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अदालत को बताया कि सात खाड़ी देशों में सीबीएसई की परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं, जिससे दो वर्गों के छात्र प्रभावित हुए नियमित विद्यालयी छात्र और निजी परीक्षार्थी। उन्होंने कहा कि नियमित छात्रों का मूल्यांकन स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर किया जा सकता था, लेकिन निजी परीक्षार्थियों के पास स्कूल आधारित आंतरिक मूल्यांकन के अंक उपलब्ध नहीं थे। 
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इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने नई नीति के तहत निजी छात्रों के लिए अलग मूल्यांकन व्यवस्था तैयार की है। नई नीति के अनुसार, जिन विषयों की परीक्षाएं रद्द हुई थीं, उनमें अंक निर्धारित करने के लिए कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा के थ्योरी अंकों को 40 प्रतिशत वेटेज और कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा के थ्योरी अंकों को 60 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि नए फार्मूले के आधार पर तैयार किए गए परिणाम में याचिकाकर्ता को उसके पूर्व प्रदर्शन से बेहतर अंक मिले हैं। उन्होंने कहा कि परिणाम ई-मेल के माध्यम से छात्र को भेज दिया गया है और इसे जल्द ही डिजिलॉकर पर भी उपलब्ध करा दिया जाएगा।


 
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कॉलेजियम के फैसले न्यायिक समीक्षा से बाहर : सुप्रीम कोर्ट 
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सांविधानिक अदालतों में जजों की नियुक्ति से संबंधित कॉलेजियम के फैसले उसके सदस्यों की व्यक्तिपरक संतुष्टि पर आधारित होते हैं और ये फैसले न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं। शीर्ष अदालत ने हिमाचल प्रदेश के एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी की याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट कोलेजियम को अपना नाम हाईकोर्ट जज के रूप में पदोन्नति के लिए विचार करने का निर्देश देने की मांग की थी।

जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने मौखिक रूप से याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे धैर्य रखें क्योंकि उनके बचे हुए 10 वर्ष के सेवा काल में भविष्य में और रिक्तियां आएंगी। धर्मशाला के फैमिली कोर्ट के प्रधान जज अरविंद मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से हिमाचल हाईकोर्ट कॉलेजियम को उनके नाम पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद कोलेजियम ने उनके कनिष्ठों के नाम भेज दिए। ब्यूरो

थोड़ा धैर्य रखें, देखते हैं कॉलेजियम क्या करता है
जस्टिस नागरत्ना ने कहा, कृपया इंतजार करें, देखते हैं वहां का कॉलेजियम क्या करता है। हो सकता है कि आपकी उम्मीदवारी को अस्वीकार नहीं किया गया हो। कॉलेजियम की कार्यवाही की गोपनीयता और स्वायत्तता पर जोर देते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ये कॉलेजियम की व्यक्तिपरक संतुष्टि के मामले हैं। क्या न्यायिक पक्ष से सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को यह कह सकता है कि आप ऐसा करो, वैसा करो, उनका नाम विचार में लो? यह नहीं किया जा सकता। यह हमारे अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

यूपी : दस लाख रुपये मुआवजे पर सुप्रीम रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार को अवैध रूप से हिरासत में रखे गए एक व्यक्ति को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने यूपी सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक 10 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाएगा। यूपी सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के केवल मुआवजा संबंधी हिस्से को चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने स्वीकार किया कि गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के लिखित आधार उपलब्ध नहीं कराए गए थे। उन्होंने अदालत को बताया कि संबंधित थाना प्रभारी को निलंबित किया जा चुका है। हालांकि, सरकार का कहना है कि मुआवजे की राशि अधिक है और उसी पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

भरत भूषण मुठभेड़ : तत्काल सुनवाई से सुप्रीम इन्कार
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले में दायर जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से सोमवार को इन्कार कर दिया। वकील विशाल तिवारी की ओर से दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। साथ ही जांच की निगरानी खुद सुप्रीम कोर्ट करेे।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया। हालांकि पीठ ने याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष उल्लेख करने का निर्देश दिया।
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