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SC Updates: सोनम वांगचुक की हिरासत के मामले में कोर्ट ने टाली सुनवाई, अब 15 अक्तूबर को होगी

Tue, 14 Oct 2025 03:56 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI
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लद्दाख में पिछले महीने हुई हिंसा के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत जेल में बंद सोनम वांगचुक की रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट अब 15 अक्तूबर को सुनवाई करेगा। गौरतलब है कि सोनम की हिरासत को अवैध बताते हुए उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने याचिका दायर की थी। कोर्ट ने पहले इस मामले की सुनवाई के लिए 14 अक्तूबर की तारीख निर्धारित की थी। हालांकि, आज कोर्ट ने समय की कमी की बात कहते हुए मामले की सुनवाई अगले दिन यानी बुधवार तक के लिए टाल दी। 
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सुप्रीम कोर्ट का दमन के सांसद को बॉम्बे हाईकोर्ट जाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दमन और दीव के सांसद की एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। सांसद ने अपनी याचिका में दमन स्थित केंद्र शासित प्रदेश सचिवालय भवन के नवीनीकरण, विध्वंस और जीर्णोद्धार में लगभग 33 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की अदालत की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग की थी।

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सांसद उमेशभाई बाबूभाई पटेल से अपनी याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर करने को कहा। सुनवाई के दौरान, पटेल के वकील ने दलील दी कि सांसद पर 52 एफआईआर दर्ज हैं और वह लोकपाल द्वारा पारित एक आदेश को भी चुनौती दे रहे हैं।

वकील ने दलील दी कि सांसद के खिलाफ कई मामले केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन में भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन के खिलाफ उनकी आवाज उठाने का नतीजा हैं। इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा, "क्या एक सांसद और एक आम नागरिक के लिए कानून अलग-अलग हो सकते हैं?"

जब वकील ने तर्क दिया कि पटेल जनता की ओर से काम करने वाले एक निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, तो मुख्य न्यायाधीश गवई ने जवाब दिया, "यह ठीक है। आप अधिकार क्षेत्र वाले उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।"

आईक्लाउड पासवर्ड तेलंगाना पुलिस को सौंपे टी प्रभाकर, फोन टैपिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट
तेलंगाना के स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व प्रमुख टी प्रभाकर राव के खिलाफ चल रहे फोन टैपिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने राव को निर्देश दिया है कि वे अपने आईक्लाउड अकाउंट का पासवर्ड राज्य पुलिस को फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में सौंपें। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने यह भी कहा कि राव को जांच अधिकारी के सामने पेश होकर जांच में पूरा सहयोग करना होगा। साथ ही, कोर्ट ने उन्हें किसी भी जबरन कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा देना जारी रखा है।

जांच में रुकावट और सबूत मिटाने का आरोप
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि राव जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राव ने अपने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को फॉर्मेट कर सबूत नष्ट कर दिए, जबकि कोर्ट की सुरक्षा उन्हें मिली हुई थी। मेहता ने बताया कि उन्होंने डिवाइस को ऐसा फॉर्मेट किया है कि वह बिल्कुल नया लग रहा है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी यही कहा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि राव ने 15 हार्ड डिस्क खरीदी थीं, जिससे संदेह है कि उन्होंने बैकअप लिया है, लेकिन अब दावा कर रहे हैं कि उनके पास कुछ नहीं है।

राव की तरफ से आरोपों का खंडन
राव की ओर से वरिष्ठ वकील डी. एस. नायडू ने अदालत में दलील दी कि राव जांच में पूरी तरह से सहयोग कर रहे हैं और यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि राव से पूछताछ के दौरान राजनीतिक नेताओं, सांसदों और विधायकों को भी आने की अनुमति दी गई, जो प्रक्रिया के खिलाफ है।

इस पर जस्टिस नागरत्ना ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कोई तमाशा नहीं हो सकता। सांसद और विधायक आकर पूछताछ में शामिल कैसे हो सकते हैं? यह स्वीकार्य नहीं है। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

अग्रिम जमानत के लिए आवेदन के मुद्दे पर अगले महीने सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 12 नवंबर को उस मामले की सुनवाई करेगा, जिसमें यह मुद्दा उठाया गया है कि कई याचिकाकर्ता सीधे हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर देते हैं, जबकि उन्हें पहले सत्र अदालत जाना चाहिए। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ को बताया गया कि केरल में 80 प्रतिशत से ज्यादा अग्रिम जमानत याचिकाएं पहले सीधे हाईकोर्ट में दाखिल की जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले आठ सितंबर को कहा था कि हाईकोर्ट और सत्र कोर्ट दोनों को अग्रिम जमानत याचिकाएं सुनने का अधिकार है, लेकिन कोर्ट की व्यवस्था के अनुसार पहले निचली अदालत से ही राहत मांगनी चाहिए।

उच्च न्यायपालिका में वरिष्ठता तय करने वाले मुद्दों पर सुनवाई शुरू करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 28 अक्तूबर से उच्च न्यायपालिका में वरिष्ठता तय करने वाले अहम मुद्दों पर सुनवाई शुरू करेगा। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा कि अदालत देशभर के निचले न्यायिक अधिकारियों के करियर में बाधा से जुड़े सभी अन्य मुद्दों पर भी विचार करेगी, जिसमें मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने का मुद्दा भी शामिल है। 

दिल्ली में शहरी बेघरों को दूसरे स्थान पर भेजने की गुंजाइश नहीं : नालसा
राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) के निर्माण कार्यों की वजह से शहरी बेघरों को प्रस्तावित स्थलों पर स्थानांतरित करने की कोई गुंजाइश नहीं है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी। यह भी बताया कि प्रस्तावित स्थलों पर पहले से ही अधिकतम लोग रह रहे हैं।

शीर्ष अदालत ने 29 अगस्त को नालसा को डीएमआरसी के काम के कारण राष्ट्रीय राजधानी में शहरी बेघर आश्रयों के स्थानांतरण पर निरीक्षण करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा था। इसके जवाब में नालसा ने शीर्ष अदालत में रिपोर्ट दाखिल की है। नालसा ने अपनी रिपोर्ट में सराय काले खां और आनंद विहार स्थित आठ आश्रय गृहों में रहने वाले व्यक्तियों के लिए 
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फर्जी एससी प्रमाण पत्र पर चुनाव लड़ने की शिकायत रद्द करने वाला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी एससी प्रमाण पत्र पर चार लोगों के चुनाव लड़ने की शिकायत रद्द करने वाला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला खारिज कर दिया। यह शिकायत 2008 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए उनमें से एक की ओर से फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के इस्तेमाल से जुड़ा है।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2014 में गुना में दर्ज आपराधिक शिकायत को रद्द करते हुए एक मिनी ट्रायल चलाया था। पीठ ने कहा, मुकदमे में अपराध सिद्ध होंगे या नहीं, यह प्रस्तुत साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। इस स्तर पर, यह नहीं कहा जा सकता कि इन आरोपियों के अभियोजन को शुरू में ही रोक दिया जाए। साथ ही पीठ ने निर्देश दिया कि शिकायत को बहाल किया जाए और एक वर्ष के भीतर मुकदमा पूरा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ के जून 2016 के आदेश को चुनौती देने वाली अपीलों पर फैसला सुनाया।
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